RAJGARH

37 वर्षों की निष्कलंक सेवा को सलाम:  नम आंखों से दी गई मोहनलाल शर्मा को भावभीनी विदाई सहकारिता जगत के कर्मयोगी का हुआ भव्य सम्मान, बोले— सेवा के दौरान मुझसे कोई भूल हुई हो तो क्षमा करें

 

राजगढ़। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजगढ़ में लगभग 37 वर्षों तक ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और पारदर्शिता के साथ अपनी सेवाएं देने वाले समिति प्रबंधक करेड़ी एवं ब्रांच सुपरवाइजर मोहनलाल शर्मा के सेवानिवृत्त होने पर सहकारिता परिवार ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। जिले के विभिन्न स्थानों पर आयोजित सम्मान समारोहों में सहकर्मियों ने श्री शर्मा के योगदान को याद करते हुए उन्हें सहकारिता का सच्चा कर्मयोगी बताया। भावनाओं से भरे इस अवसर पर कई सहकर्मियों की आंखें नम हो गईं।

 

श्री शर्मा के सम्मान में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक राजगढ़, प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था करेड़ी, उपायुक्त सहकारिता कार्यालय राजगढ़ तथा होटल श्री लीला पैलेस में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन समारोहों में उनका शाल, श्रीफल, पुष्पहार और स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रमों के अंत में सहभोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने आत्मीयता के साथ सहभागिता निभाई।

 

विदाई समारोह में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के महाप्रबंधक, उपायुक्त सहकारिता राजगढ़, विभिन्न शाखाओं के प्रबंधक, प्रशासक, छह से अधिक सहकारी समितियों के समिति प्रबंधक, सहायक समिति प्रबंधक, विक्रेता, कर्मचारी तथा उनके इष्ट मित्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मोहनलाल शर्मा ने अपने पूरे सेवा काल में कभी भी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और हमेशा किसानों तथा सहकारिता संस्था के हितों को सर्वोपरि रखा।

 

वक्ताओं ने कहा कि श्री शर्मा ने सहकारिता के नियमों और कार्यप्रणाली का न केवल स्वयं पूरी निष्ठा से पालन किया, बल्कि अपने साथ कार्य करने वाले कर्मचारियों को भी अनुशासन, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी। यही कारण है कि आज उनके साथ वर्षों तक काम कर चुके अनेक कर्मचारी उन्हें अपना गुरु मानते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।

 

अपने लंबे सेवा काल में उन्होंने हजारों किसानों को सहकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कार्यशैली हमेशा पारदर्शी, सरल और किसान हितैषी रही। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच वे अपनी सहजता, मधुर व्यवहार और निष्पक्ष निर्णयों के लिए विशेष पहचान रखते थे।

 

सम्मान समारोह के दौरान जब मोहनलाल शर्मा अपने संबोधन के लिए मंच पर पहुंचे तो वातावरण भावुक हो गया। उन्होंने कहा कि सहकारिता परिवार ने उन्हें जो स्नेह, सम्मान और अपनापन दिया है, वह उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने विनम्र भाव से कहा कि यदि उनके 37 वर्षों के सेवा काल में किसी भी सहयोगी, अधिकारी या किसान को उनकी किसी बात या व्यवहार से कभी ठेस पहुंची हो तो वे उसके लिए हृदय से क्षमा प्रार्थी हैं।

 

समारोह के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने उनके स्वस्थ, सुखमय और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए कहा कि मोहनलाल शर्मा जैसे कर्मठ, अनुशासित और ईमानदार अधिकारी नई पीढ़ी के कर्मचारियों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे। उनकी निष्कलंक सेवा और सहकारिता के प्रति समर्पण को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।यदि चाहें तो मैं इसे दैनिक भास्कर, पत्रिका या नई दुनिया की शैली में और अधिक प्रभावशाली बनाकर भी तैयार कर सकता हूँ।

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