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गयाजी में उच्च शिक्षा को मिली नई उड़ान, 7 प्रखंडों में डिग्री महाविद्यालयों का शुभारंभ

गयाजी (SHABD) :बिहार में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत पूर्वी चंपारण जिले के 15 प्रखंडों में नवस्थापित 15 राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में पठन-पाठन की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भागलपुर के गोराडीह स्थित राजकीय डिग्री कॉलेज में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम से वर्चुअल माध्यम के जरिए बिहार के विभिन्न जिलों में स्थापित 211 नए डिग्री कॉलेजों का शुभारंभ किया। इसमें पूर्वी चंपारण जिले के 15 राजकीय डिग्री कॉलेज भी शामिल रहे।

जिले का मुख्य कार्यक्रम तुरकौलिया प्रखंड के जयसिंहपुर स्थित राजकीय डिग्री कॉलेज परिसर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व मंत्री सह विधायक कृष्णनंदन पासवान, जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव, उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार गिरि और सदर अनुमंडल पदाधिकारी मोतिहारी अरुण कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

समारोह में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, छात्र-छात्राएं, अभिभावक, महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान नए कॉलेजों की स्थापना को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों में उत्साह देखा गया।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री सह विधायक कृष्णनंदन पासवान और जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने कहा कि जिले के 15 प्रखंडों में एक साथ डिग्री कॉलेजों की शुरुआत होना शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता था, जिससे समय और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब स्थानीय स्तर पर कॉलेज की सुविधा उपलब्ध होने से उच्च शिक्षा की पहुंच अधिक आसान होगी।

अधिकारियों ने कहा कि इन महाविद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे जिले में शिक्षा का वातावरण मजबूत होगा और युवाओं के लिए आगे बढ़ने के नए अवसर तैयार होंगे।

राजकीय डिग्री कॉलेजों के शुभारंभ को पूर्वी चंपारण में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार बढ़ेगा और अधिक से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा से जुड़ सकेंगे।

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