राजगढ़ में धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया विजयादशमी पर्व, 51 फीट के रावण का दहन
भव्य राम यात्रा में देवी-देवताओं, भगवान श्रीराम की सेना और संतों के स्वरूपों ने मोहा मन, जय श्रीराम के जयघोष से गूंजा नगर; विहिप पदाधिकारियों ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत

राजगढ़। असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी पर्व राजगढ़ नगर में परंपरागत उत्साह, धार्मिक आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दशहरा पर्व के अवसर पर भगवान श्रीराम की भव्य राम यात्रा निकाली गई। यात्रा में देवी-देवताओं, संतों, भगवान श्रीराम की सेना और रामायण के विभिन्न पात्रों के आकर्षक स्वरूपों ने नगरवासियों का मन मोह लिया। पूरे नगर में जय श्रीराम के जयघोष गूंजते रहे। राम यात्रा का विभिन्न स्थानों पर सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा स्वागत किया गया।
देवी-देवताओं और धार्मिक स्वरूपों ने बढ़ाई राम यात्रा की शोभा
राम यात्रा में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और वीर हनुमान जी के स्वरूपों के साथ रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पात्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। वहीं नौ देवियों, भगवान शंकर-पार्वती, राधा-कृष्ण, मां काली और खाटू श्याम जी के स्वरूपों ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। इसके अलावा संत प्रेमानंद जी महाराज और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के स्वरूप भी यात्रा की शोभा बढ़ाते नजर आए।
भगवान श्रीराम की सेना के रूप में वानर सेना और भालुओं के स्वरूपों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। धार्मिक झांकियों से सजी राम यात्रा ने भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। यात्रा को देखने के लिए नगरवासियों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
नगर पालिका के समीप विहिप ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत
नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई राम यात्रा दशहरा मैदान पहुंची। इस दौरान जगह-जगह सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा यात्रा का स्वागत किया गया। नगर पालिका के समीप विश्व हिंदू परिषद, राजगढ़ जिले के पदाधिकारियों ने राम यात्रा पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान धार्मिक उत्साह का माहौल रहा। आकर्षक झांकियों और जय श्रीराम के जयघोष के बीच नगर में दशहरा पर्व की रौनक देखते ही बनी।
विधि-विधान से पूजन के बाद 51 फीट के रावण का दहन
राम यात्रा के दशहरा मैदान पहुंचने के बाद 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके पश्चात रावण के पुतले का दहन किया गया। रावण दहन के साथ ही दशहरा उत्सव ने विशेष उत्साह का रूप ले लिया। यह परंपरा बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देती है।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों का संदेश देता है दशहरा
विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेने का अवसर भी है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। वहीं रावण का अंत यह संदेश देता है कि ज्ञान, शक्ति और वैभव होने के बावजूद अहंकार तथा अधर्म का मार्ग अंततः विनाश की ओर ले जाता है।
विजयादशमी का पर्व समाज को सत्य, सदाचार, न्याय और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इसी संदेश के साथ राजगढ़ नगर में विजयादशमी का पर्व धार्मिक उत्साह और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।




