राजस्‍थान

स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की आधारशिला, स्वस्थ भारत के निर्माण में चिकित्सकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण- विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी

जयपुर, 1 अगस्त। भारतीय सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (आईएसए) राजस्थान स्टेट ब्रांच द्वारा आयोजित 27वें राजस्थान राज्य वार्षिक सम्मेलन ‘‘राजिसाकॉन-2026 का शुभारंभ शनिवार को पुष्कर स्थित जॉलिवुड रिसोर्ट में विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने किया। सम्मेलन का आयोजन इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स, राजस्थान स्टेट ब्रांच एवं एनेस्थीसियोलॉजी विभाग, जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अजमेर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि राजस्थान की पावन धरा और विश्व प्रसिद्ध तीर्थराज पुष्कर में आयोजित यह सम्मेलन चिकित्सा जगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चिकित्सा विज्ञान निरंतर विकसित हो रहा है और एनेस्थीसियोलॉजी आज आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है।

श्री देवनानी ने कहा कि किसी भी जटिल शल्य चिकित्सा की सफलता केवल सर्जन पर निर्भर नहीं होती, बल्कि एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की विशेषज्ञता और सतर्कता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। रोगी की सुरक्षा, जीवन रक्षा तथा सुरक्षित उपचार सुनिश्चित करने में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका अत्यंत सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान की प्रगति ने मानव जीवन की रक्षा के नए आयाम स्थापित किए हैं। आज ऎसी जटिल शल्य प्रक्रियाएं संभव हो सकी हैं, जिनकी कल्पना कुछ दशक पूर्व तक कठिन मानी जाती थी। इस उपलब्धि के पीछे अनेक विशेषज्ञ शाखाओं का सामूहिक योगदान है। इनमें एनेस्थीसियोलॉजी एक ऎसी विद्या है, जिसने चिकित्सा जगत में सुरक्षा, विश्वास और सफलता के नए मानक स्थापित किए हैं तथा आधुनिक सर्जरी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

उन्होंने कहा कि आज एनेस्थीसियोलॉजी का कार्यक्षेत्र केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं रह गया है। गहन चिकित्सा (आईसीयू), आपातकालीन सेवाओं, ट्रॉमा प्रबंधन, अंग प्रत्यारोपण, दर्द निवारण चिकित्सा तथा गंभीर रोगियों की देखभाल में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि जब कोई रोगी ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंचता है, तब उसके साथ पूरे परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं और उन उम्मीदों को सुरक्षित परिणाम तक पहुंचाने में एनेस्थीसियोलॉजिस्ट महत्वपूर्ण कड़ी होता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारें स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, चिकित्सा शिक्षा के सुदृढ़ीकरण और आधुनिक उपचार सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का प्रत्येक नागरिक स्वस्थ होगा। चिकित्सकों की भूमिका केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण के सशक्त भागीदार हैं।

भारत की महान संस्कृति ने सदैव जीवन की रक्षा को सर्वाेच्च माना है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि दूसरों के कल्याण से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। चिकित्सा सेवा इसी महान भावना का साकार स्वरूप है। एक चिकित्सक जब किसी पीड़ित व्यक्ति के जीवन को सुरक्षित करने के लिए अपना ज्ञान, अनुभव और समय समर्पित करता है, तब वह मानवता की सबसे पवित्र सेवा का निर्वहन करता है।

सम्मेलन के अंतर्गत छह एडवांस्ड हैंड्स-ऑन वर्कशॉप आयोजित की गई हैं। इनमें रिसर्च मेथडोलॉजी, डिफिकल्ट एयरवे मैनेजमेंट, मैकेनिकल वेंटिलेशन, अल्ट्रासाउंड आधारित तकनीकों सहित अनेक समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया।

सम्मेलन में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर के निदेशक प्रो. (डॉ.) गोवर्धन पुरी, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रमोद येले, जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सामरिया एवं अधीक्षक डॉ. अरविन्द खरे, इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स के राष्ट्रीय एवं राजस्थान स्टेट ब्रांच के पदाधिकारी, एम्स, विभिन्न मेडिकल कॉलेजों एवं संस्थानों के वरिष्ठ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, शोधकर्ता, विशेषज्ञ चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर तथा देश-विदेश से आए चिकित्सा विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे

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