श्रावण माह के प्रथम दिवस पर श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, संत प्रेम नारायण जी ने मानव जीवन को संवारने का दिया संदेश

राजगढ़। श्रावण माह के प्रथम दिवस पर धर्म, आस्था और भक्ति का अनुपम संगम उस समय देखने को मिला जब राजगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग चार किलोमीटर दूर मोतीपुरा जोड़ स्थित अखिल भारतीय सोंधिया क्षत्रिय समाज की सामाजिक भूमि पर एक दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया गया। प्रसिद्ध संत श्री प्रेम नारायण जी (गेहूंखेड़ी) के श्रीमुख से आयोजित कथा में हजारों श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा श्रवण किया। कथा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा, जहां महिलाओं, युवाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों के साथ अनेक जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
श्रावण माह के शुभारंभ पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। कथा प्रारंभ होने से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीमद्भागवत का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद संत श्री प्रेम नारायण जी ने श्रीमद्भागवत की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। जो व्यक्ति अपने जीवन में सत्य, सेवा, करुणा और भगवान के स्मरण को स्थान देता है, उसका जीवन स्वतः सुख, शांति और संतोष से भर जाता है।
उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में मानसिक शांति खोता जा रहा है। श्रीमद्भागवत हमें सिखाती है कि वास्तविक आनंद धन-संपत्ति में नहीं, बल्कि ईश्वर भक्ति, सदाचार और परोपकार में है। मनुष्य यदि अपने व्यवहार में प्रेम, विनम्रता, क्षमा और सेवा का भाव अपना ले, तो परिवार, समाज और राष्ट्र सभी मजबूत बन सकते हैं।
संत श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि माता-पिता की सेवा, गुरु का सम्मान और जरूरतमंदों की सहायता ही सच्चा धर्म है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जीवन की हर परिस्थिति में धर्म का मार्ग ही मनुष्य को सफलता और आत्मिक शांति प्रदान करता है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। भगवान श्रीकृष्ण के भजनों और संगीतमय प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर संत श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा समाज एवं देश की सुख-समृद्धि की कामना की।
आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे, युवा, समाज के वरिष्ठजन एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। आयोजन की व्यवस्थाओं में समाज के पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे पूरे कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
श्रावण माह के प्रथम दिवस पर आयोजित यह कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और मानव सेवा का संदेश देने वाला प्रेरणादायी आयोजन बन गई। कथा के समापन पर विश्व कल्याण, राष्ट्र की उन्नति, समाज में सुख-शांति तथा जनकल्याण की मंगलकामना के साथ श्रद्धालुओं ने धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।




