ब्यावरा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत चारपुरा में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पंवार ने किया पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती का दिया संदेश

ब्यावरा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत चारपुरा में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पंवार ने किया पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती का दिया संदेश
हरियाली महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को ब्यावरा विकासखंड की ग्राम पंचायत चारपुरा में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग श्री नारायण सिंह पंवार ने लवकुश मंदिर प्रांगण तथा शासकीय प्राथमिक विद्यालय परिसर में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों एवं ग्रामवासियों के साथ पौधारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, वृक्षों के महत्व, प्राकृतिक संतुलन तथा जैविक खेती को लेकर उपस्थित नागरिकों से विस्तारपूर्वक संवाद किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पंवार ने कहा कि चारपुरा क्षेत्र के नागरिक प्रकृति संरक्षण के प्रति अत्यंत जागरूक हैं और यही जागरूकता आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित भविष्य का आधार बनेगी। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण और संवर्धन भी प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों का स्थान केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें देवतुल्य एवं पूजनीय माना गया है। पीपल, बरगद, नीम, तुलसी सहित अनेक वृक्ष हमारी धार्मिक आस्था, परंपरा और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। हमारी सभ्यता ने सदैव प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा दी है। पेड़ों का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि यही हमें प्राणवायु ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जलवायु को संतुलित रखते हैं, वर्षा चक्र को बनाए रखते हैं, भूजल संरक्षण में सहायक होते हैं तथा जैव विविधता को सुरक्षित रखते हैं।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पंवार ने कहा कि आधुनिक विकास की दौड़ में मानव ने प्रकृति के साथ लगातार छेड़छाड़ की है। अंधाधुंध वृक्षों की कटाई, रासायनिक प्रदूषण तथा प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण पर्यावरण असंतुलित होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि खेती में रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से अनेक लाभकारी जीव-जंतु, पक्षी एवं सूक्ष्म जीव समाप्त हो रहे हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर मिट्टी की उर्वरता, जल की गुणवत्ता तथा मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।
उन्होंने किसानों से जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जैविक खेती केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और पौष्टिक खाद्यान्न उपलब्ध कराने का प्रभावी मार्ग है। गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से खेती अधिक टिकाऊ, कम लागत वाली और पर्यावरण के अनुकूल बन सकती है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पंवार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में चलाया जा रहा “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति, मातृत्व और भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि प्रत्येक परिवार कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल अपने परिवार के सदस्य की तरह करे।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक प्रतिवर्ष एक पौधा लगाकर उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करने का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में हमारा क्षेत्र हरित, स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बन सकता है। वृक्ष हमें शुद्ध वायु, स्वच्छ वातावरण, छाया, फल, औषधियां और प्राकृतिक संतुलन प्रदान करते हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।




