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बाल कल्याण समिति के प्रयासों से 5 वर्ष बाद परिवार से मिला गुमशुदा बालक,,,,

 

राजगढ़ जिले में जिलाधीश श्री गिरीश कुमार मिश्रा और के मार्गदर्शन और डीपीओ श्री श्याम बाबू के समन्वय से कार्य कर रही बाल कल्याण समिति राजगढ़ जिसमें अध्यक्ष श्री साकेत शर्मा, सदस्य सर्वश्री सुरेश चंद्रवंशी, श्री निलेश मालवीय, श्रीमती रिंकू सुनेरी, श्रीमती सलमा अंसारी है के समक्ष सितम्बर 2025 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की बाल कल्याण समिति से एक बालक की गुमशुदगी से संबंधी पत्र आया था, जिस पर कई तरह की कार्यवाही उपरांत अंततः सूचना के 8 माह के बाद अब बाल कल्याण समिति राजगढ़ ने बालक को उसके दादाजी को उसके ताऊजी, काकाजी, मामाजी, बुआजी फूफाजी सहित कई परिवारजनों के समक्ष सुपूर्द किया,

 

घटना इस प्रकार की है कि बालक राजगढ़ के पास के ही ग्राम ##### (पहचान गोपनीय) के बालक @@@@ (पहचान गोपनीय) जो आज से पांच वर्ष पूर्व जब बालक मात्र 10 वर्ष उम्र था तब जुलाई 2021 में ट्रेन में सूरत से भागलपुर सफर करते हुए गलती से मालदा रेलवे स्टेशन आ गया था मालदा जीआरपी और आरसीएल मालदा ने रेलवे चाइल्ड लाइन से काउंसलिंग, मेडिकल करवाकर पश्चिम बंगाल सरकार के सर्कुलर 2883 दिनांक 03/05/2009 का हवाला देते हुए बालक को बाल कल्याण समिति जिला मुर्शिदाबाद ट्रांसफर कर दिया जबकि बालक राजगढ़ जिले में तब ही आवश्यक दस्तावेज की पूर्ति उपरांत ट्रांसफर किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया, फिर मुर्शिदाबाद की बाल कल्याण समिति ने बालक को काजी नजरुल इस्लाम चिल्ड्रन होम बेहरामपुर जिला मुर्शिदाबाद में आश्रय दिया, उसके बाद cwc मुर्शिदाबाद, चिल्ड्रन होम मुर्शिदाबाद, dcpo जिला मुर्शिदाबाद, DCPO जिला राजगढ़, कलेक्टर मुर्शिदाबाद, संचालक प्रदेश चाइल्ड राइट्स एंड ट्रैफिकिंग विभाग पश्चिम बंगाल सरकार बीच में बालक से संबंधित कई पत्रों का आदान प्रदान लगातार हुआ, परंतु बालक के माताजी पिताजी परिवारजनों की कही कोई खोज खबर नहीं हो पाई इससे बालक पिछले पांच वर्षों से वही काजी नजरुल इस्लाम चिल्ड्रन होम मुर्शिदाबाद में रहा वहां उसने 8 वीं तक की पढ़ाई की, इस बीच में एक जनवरी 2022 में राजगढ़ DCPO को भी आया जिसमें बालक की सामाजिक जांच रिपोर्ट को लेकर DCPO राजगढ़ को भी पत्र लिखा जिस पर विभाग द्वारा बालक के आधारकार्ड अनुसार पते की जांच करवाकर राजगढ़ की संबंधित ग्राम (पहचान गोपनीय) का नहीं है कह कर मुर्शिदाबाद भेज दी गई,

 

इस पूरे प्रकरण में जैसे ही बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री साकेत शर्मा को विभागीय जांच के बाद भी बालक नहीं मिलने की बात पता चली जबकि आधार कार्ड उसी ग्राम का था, तो उन्होंने अपने खुद के स्तर पर व्यक्तिगत प्रयास करते हुए संबंधी ग्राम में अपने कई परिचितों से संपर्क किया जिस पर कईयों ने बालक के पिताजी से संबंधित कोई जानकारी नहीं होने की बात कही, परंतु साकेत शर्मा ने हार माने बिना लगातार और भी संपर्कों को सूचना देते रहे, जब साकेत शर्मा स्वयं संबंधित गांव गए वहां सरपंच, पंचायत सचिव, सोसायटी के सेकेट्री, कई दुकानदारों, सहित कई व्यक्तियों से मिले जिस उन्हें महत्वपूर्ण जानकारी लगी कि इस संबंधित नाम के गांव में दो व्यक्ति रहते थे परंतु एक जरूर पिछले पर लगभग 12 वर्षों से किन्हीं पारिवारिक और आर्थिक परेशानियों के चलते यहां से कही बाहर मजदूरी करने चले गए थे हो सकता है उस परिवार का बालक हो, साकेत शर्मा ने तत्काल उस परिवार से मिलने की इच्छा जाहिर की जब परिवारजनों से पूछा बालक और उसके पिताजी के पहचान संबंधी जानकारी ली तो उन्होंने एकदम सही जानकारी दी तब साकेत शर्मा को यकीन हो गया कि बालक इनके परिवार का ही है इनका पोता है परंतु पिताजी माताजी की कोई जानकारी नहीं है, कि वह अब कहां है, दादाजी, दादीजी ताऊजी, ताई जी, काकाजी काकीजी, मामा बुआजी फूफाजी सब है बालक की दो बहने भी यही पर है एक का विवाह भागलपुर बिहार में किया है, यह पूरी जानकारी मैच हो रही थी

 

बाल कल्याण समिति अध्यक्ष श्री साकेत शर्मा को परिवारजनों ने बताया कि पिताजी माताजी 12 साल पहले बालक और उसकी दो बहनों को लेकर मजदूरी के संबंध में गुजरात या बिहार कही चले गए थे तब अब तक हमें उनका पता नहीं है, कभी कभी कुशलक्षेम के लिए मोबाइल पर बात जरूर होती थी

 

बालक बहुत अच्छे से बंगाली भाषा बोलता है और टूटी फूटी हिंदी समझ और बोल लेता है, बालक के पिताजी और माताजी की अभी cwc को कोई खबर नहीं लगी है,

 

इसके बाद लगभग 6 माह बाद बाल कल्याण समिति राजगढ़ ने बालक की सामाजिक जांच रिपोर्ट और ग्रह अध्ययन के आधार पर बालक को मुर्शिदाबाद से राजगढ़ बाल कल्याण समिति को तत्काल ट्रांसफर करने के लिए पत्र लिखा परन्तु पश्चिम बंगाल सरकार में चुनाव होने के कारण एस्कार्ट गार्ड उपलब्ध नहीं होने कारण बालक को जल्दी राजगढ़ ट्रांसफर कर असमर्थता व्यक्त की, इस पर अध्यक्ष श्री साकेत शर्मा ने मुर्शिदाबाद जिले के कई विभागीय अधिकारियों से बालक को तत्काल राजगढ़ ट्रांसफर करने का आग्रह किया परन्तु कोई प्रभावी सहयोग नहीं मिला, फिर चुनाव खत्म होने के बाद बालक को एस्कार्ट मिली और ट्रेन में रिजर्वेशन हुआ तब बालक 3 मई 2026 में राजगढ़ पहुंचा परिवारजनों को बुलाया जैसे ही बालक ने अपने दादाजी को देखा और पहचान कर बालक उनके गले लग गया और बहुत भावुक हो गया सभी उपस्थित लोग भी इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए और उसी दिवस बालक को उसके सभी परिवारजनों को तय प्रक्रिया के बाद सुपुर्द कर दिया गया,,,,

 

 

बाल कल्याण समिति राजगढ़ अपने अध्यक्ष श्री साकेत शर्मा, सदस्य सर्वश्री सुरेश चंद्रवंशी, श्री निलेश मालवीय, श्रीमती रिंकी सुनेरी, श्रीमती सलमा अंसारी के साथ *””जिसका कोई नहीं उसकी बाल कल्याण समिति””* के ध्येय वाक्य को लेकर लगातार कार्य कर रही है

 

 

*बॉक्स में*

*वर्जन—*

 

आज मेरा मन अति प्रसन्न है कि हमारा प्रयास से कई बच्चों को अपना परिवार फिर मिल रहा है इस बालक में विषय में सच में उसके साथ उसके भाग्य और हमारी व्यवस्थाओ ने अच्छा नहीं किया, कई बार हम सामान्य विषय मान कर विषय खत्म कर देते है तो कइयों के साथ कितना बड़ा अन्याय हो जाता है ये हम विचार नहीं करते है, थोड़ा व्यक्तिगत होकर प्रयास करो तो सफलता जरूर मिलती है, आज मेरे जीवन का यह महत्वपूर्ण क्षण है जब बालक को सुपुर्द दी तब परिवारजन, बालक और हम सभी बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सहित सदस्यगण भावुक हो गए थे, सच में इस भावुकता को भावुक होने वाला ही महसूस कर सकता है

एक दुख जरूर है कि बालक को ट्रांसफर हेतु एस्कार्ट पुलिस गार्ड पश्चिम बंगाल सरकार से नहीं से मिलने के कारण देर हो गई यदि थोड़ा जल्दी आ जाता तो बालक की दादीजी उसका चेहरा देख लेती वह जरूर हमसे कई बार बालक कब आएगा पूछ्ते पूछते पिछले कुछ दिन पूर्व दिवंगत हो गई, बालक आज अपने परिवारजनों के साथ है और हम ईश्वर को धन्यवाद दे रहे है उस ईश्वरीय कार्य में बाल कल्याण समिति जरिए बनी है

हमें आज भी पलायन मजदूरी, उधार लेने देने की कुरीति, बधुआ मजदूरी जैसे मामलों को बहुत गंभीरता से देखने और इनको खत्म करने की दिखा में काम करने की बहुत जरूरत है

 

श्री साकेत शर्मा

अध्यक्ष

बाल कल्याण समिति राजगढ़

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