RAJGARH

 जल गंगा संवर्धन अभियान में राजगढ़ डगवेल रिचार्ज में प्रथम स्‍थान पर  फार्म पॉन्ड में द्वितीय स्‍थान पर 

 

 

 

राजगढ़ 05 मार्च, 2026

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्‍यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि शासकीय कार्यक्रमों एवं कार्यालयों में प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग को हतोत्साहित किया जाए तथा पारंपरिक जल संग्रहण के साधन ‘मटके’ को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है। बैठक में आगामी “जल गंगा संवर्धन कार्यक्रम” के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी कलेक्टरों को सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। इस योजना में खेत, तालाब, कूप रिचार्ज, रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे जल संरक्षण के कार्यों को व्यापक स्तर पर शामिल करने पर जोर दिया गया। साथ ही प्रदेश स्‍तर पर जल गंगा संवर्धन अभियान में राजगढ़ डगवेल रिचार्ज में प्रथम स्‍थान पर व फार्म पॉन्ड में द्वितीय स्‍थान पर हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “संकल्प से समाधान” कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की और निर्देश दिए कि इसकी दैनिक आधार पर मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि जनसमस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। वीडियो कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री चंद्रकांत रघुनाथ पाटिल भी उपस्थित रहे। इस दौरान “जल संचय–जल भागीदारी” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों की समीक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं मंत्री श्री पाटिल द्वारा की गई। बैठक में बताया गया कि जल संरक्षण कार्यों में राजगढ़ जिले का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है और प्रदेश के 55 जिलों में राजगढ़ को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा प्रस्तुति दी गई, जिसमें जिले में किए गए नवाचारों और प्रभावी प्रयासों की जानकारी दी गई।

 

कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने बताया कि जिले में “टोटी लगाओ अभियान” जैसे जनभागीदारी आधारित प्रयासों को बढ़ावा दिया गया, जिससे पानी के अनावश्यक अपव्यय पर नियंत्रण हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावी जल संरक्षण कार्यों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन में कमी आई है तथा जिले में भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इन प्रयासों में जनसहभागिता और प्रशासन की सतत निगरानी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

 

*

Related Articles

Back to top button