हिन्दू महासम्मेलन बना सामाजिक चेतना का महाकुंभ
कलश यात्रा, पंच परिवर्तन और समरसता का दिया सशक्त संदेश

राजगढ़।सकल हिन्दू समाज, राजगढ़ नगर के तत्वावधान में आयोजित विराट हिन्दू महासम्मेलन रविवार को स्टेडियम प्रांगण में भव्यता, अनुशासन और सामाजिक चेतना के साथ ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। नगर सहित आसपास के अंचलों से पहुँचे हजारों की संख्या में समाजजनों की सहभागिता ने आयोजन को अभूतपूर्व स्वरूप प्रदान किया। यह महासम्मेलन हिन्दू समाज को संगठित, जागरूक और संस्कारित दिशा देने वाला प्रभावशाली मंच सिद्ध हुआ।
महासम्मेलन का शुभारंभ संत सानिध्य में पूज्यपाद महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 श्री ईश्वरानंद ब्रह्मचारी उत्तम स्वामी जी महाराज के पावन आशीर्वचनों से हुआ। विशेष अतिथि के रूप में श्री हेमंत मुक्तिबोध (मध्य क्षेत्र, क्षेत्र सह कार्यवाह) एवं डॉ. निवेदिता शर्मा (राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, हिन्दू जागरण मंच) मंचासीन रहे। वक्ताओं ने हिन्दू समाज को संगठित होकर सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक दायित्वों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
7100 कलशों की यात्रा ने रचा इतिहास
महासम्मेलन से पूर्व निकाली गई 7100 कलशों की विशाल कलश यात्रा एवं शोभायात्रा ने पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। राजमहल प्रांगण से प्रारंभ हुई यात्रा में हाथी पर सुसज्जित झांकी, 12 घोड़े, 27 ट्रैक्टरों पर सजी आकर्षक झांकियाँ तथा 58 महापुरुषों के जीवंत स्वरूप सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का संदेश देते हुए नगर भ्रमण करते नजर आए। शोभायात्रा स्टेडियम प्रांगण पहुँचकर महासम्मेलन में परिवर्तित हुई।
पंच परिवर्तन पर दिया गया स्पष्ट मार्गदर्शन
महासम्मेलन का केंद्रीय विषय “पंच परिवर्तन” रहा। संतों एवं वक्ताओं ने स्वच्छता एवं स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता तथा नागरिक कर्तव्य एवं संस्कार जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखते हुए इन्हें व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने नशा, सामाजिक विघटन, संस्कारहीनता और असंगठित आचरण जैसी कुरीतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए समाज को संगठित प्रयासों, सेवा कार्य और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
समरसता सहभोज ने दिया एकता का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर आयोजित समरसता सहभोज सामाजिक एकता का सशक्त प्रतीक बना। सुव्यवस्थित व्यवस्था के चलते सीमित समय में हजारों समाजजनों ने पंक्तिबद्ध होकर सहभोज किया, जिससे सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत हुआ।
प्रदर्शनियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं आकर्षण
महासम्मेलन स्थल पर माँ भारती के समक्ष यज्ञ कर सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने का संकल्प लिया गया। साथ ही पिछले 15 दिनों से चले कार्यक्रमों की प्रदर्शनी, संघ स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर स्वयंसेवकों द्वारा विधिवत शाखा का जीवंत प्रदर्शन, श्रीराम दरबार की भव्य झांकी, पाँच संदेशपरक नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुतियाँ एवं स्वदेशी उत्पादों के स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
