महाविद्यालय में हुआ श्रीमदभगवत गीता, अध्याय 15 का सस्वर पाठ एवं वाचन

राजगढ़ अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भागवत गीता जयंती कार्यक्रम अंतर्गत महाविद्यालय में श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 15 का सस्वर पाठ का गायन एवं वाचन किया गया। साथ ही महाविद्यालय प्राध्यापक वक्ताओं द्वारा श्रीमद्भागवत गीता के महत्व पर आख्यान दिया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य डॉ. वी.बी. खरे, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. रजनी खरे, डॉ. मंगलेश सोलंकी द्वारा मां सरस्वती एवं भगवतगीता की पुस्तक पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गया। कार्यक्रम का संचालन श्री अशोक विजयवर्गीय द्वारा कार्यक्रम की रूपरेखा विद्यार्थियों एवं उपस्थित प्राध्यापक को साथियों को बताई गई।
वक्ता डॉ. सोलंकी द्वारा भगवतगीता के महत्व पर बताते हुए रुस से पधारे राष्ट्रपति श्री ब्लादिमीर पुतिन के वक्तव्य के विषय में बताया की “भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता की रूस में पूजा की जाती है” यह हमारे देश के लिए बहुत गौरव की बात है। डॉ. रजनी खरे द्वारा गीता जी के श्लोक का वाचन किया। साथ ही उनके अर्थ को बताते हुए उनको अपने जीवन में चरितार्थ एवं आत्मार्पित करने हेतु बात कही गई। डॉ. राम गोपाल दांगी द्वारा गीता के विषय में महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा की। साथ ही कहां की कर्म ही धर्म है तथा विश्व में सबसे अधिक अध्ययन करने वाला अगर कोई ग्रंथ है तो वहां श्रीमद् भागवत गीता है।
तत्पश्चात संस्था प्राचार्य डॉ. खरे द्वारा श्रीमद् भागवतगीता के महत्व एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रीमद्भगवत गीता का क्या महत्व है, क्या भूमिका है आदि के विषय में विद्यार्थियों को बताया गया।


