ओपीएम में ‘कागजी लकड़ियों’ का काला कारोबार: 30 मिनट में लोडिंग-अनलोडिंग का ‘चमत्कार’, करोड़ों का बोनस डकार गया सिंडिकेट

अमलाई (शहडोल) | असलम बाबा ।एशिया के औद्योगिक मानचित्र पर अपनी पहचान रखने वाली ओरिएंट पेपर मिल (OPM) इन दिनों कागज कम और ‘भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान’ ज्यादा गढ़ रही है। मिल की चिमनियों से उठने वाले धुएं के बीच एक ऐसा काला खेल चल रहा है, जिसने न केवल सरकारी राजस्व को चपत लगाई है, बल्कि उन गरीब किसानों के हक पर भी डाका डाला है, जो पसीने से अपनी फसल सींचते हैं। यहाँ ‘लकड़ी माफिया’ ने तकनीक और तंत्र की मिलीभगत से भ्रष्टाचार का ऐसा ‘शॉर्टकट सॉफ्टवेयर’ तैयार किया है, जिसके कारनामे सुनकर जांच एजेंसियां भी हैरान हैं।
फिजिक्स फेल, माफिया पास: आधे घंटे में ‘जादुई’ एंट्री
अमलाई के इस औद्योगिक परिसर में विज्ञान के नियम भी घुटने टेक चुके हैं। रिकॉर्ड्स की मानें तो एक भारी-भरकम ट्रक या ट्रैक्टर मिल के भीतर प्रवेश करता है, वजन कराता है, लकड़ी खाली (Unload) करता है और महज 30 मिनट के भीतर बाहर भी निकल जाता है।
“व्यावहारिक रूप से जिस लकड़ी को उतारने और कागजी प्रक्रिया पूरी करने में कम से कम 3 से 4 घंटे लगते हैं, उसे माफिया ने कागजों पर 30 मिनट में निपटा दिया। यह सीधे तौर पर बोगस बिलिंग और सर्कुलर ट्रेडिंग का मामला है, ताकि जीएसटी (GST) की चोरी की जा सके।”
किसानों का पसीना, माफिया की तिजोरी
मिल प्रबंधन और माफिया के बीच का यह नापाक गठबंधन सीधे तौर पर किसानों की जेब काट रहा है। नियमतः, लकड़ी की आपूर्ति पर मिलने वाला करोड़ों का बोनस सीधे किसानों के खातों में जाना चाहिए। लेकिन यहाँ खेल ‘कागजी किसानों’ के जरिए हो रहा है। वास्तविक किसान आज भी खाली हाथ है, जबकि माफिया सफेदपोश बनकर बोनस की मलाई डकार रहे हैं। यह एक बड़ा वित्तीय घोटाला है जिसमें बेनामी खातों के इस्तेमाल की आशंका है।
सुरक्षा तंत्र पर सवाल: क्यों खामोश है ‘कांटा’?
सबसे बड़ा सवाल ओपीएम के सुरक्षा तंत्र और धर्मकांटा (Weighbridge) विभाग पर खड़ा हो रहा है। क्या प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों को यह ‘डबल लोडिंग’ का खेल नहीं दिख रहा? या फिर खामोश रहने के लिए ‘चढ़ावा’ ऊपर तक पहुंच रहा है?
फर्जी इनवॉइस: बिना लकड़ी के सिर्फ गाड़ियों के नंबर दर्ज कर फर्जी इनवॉइस जेनरेट किए जा रहे हैं।
जीएसटी चोरी: इन फर्जी बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ लिया जा रहा है।
आयकर की रडार: सूत्रों के अनुसार, अब यह मामला आयकर विभाग और जीएसटी इंटेलिजेंस के रडार पर है।
शिकंजा: अमलाई थाने से दिल्ली तक गूंज
यह सिंडिकेट अब ज्यादा दिनों तक कानून की आंखों में धूल नहीं झोंक पाएगा। अमलाई थाने में पहुंची शिकायतों और विभागीय सक्रियता ने माफियाओं की नींद उड़ा दी है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन फर्जी फेरों (Trips) में कौन-कौन से वाहन शामिल थे और उनके मालिक कौन हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस घोटाले की निष्पक्ष जांच हुई, तो ओपीएम के कई ‘सफेदपोश’ अधिकारी और रसूखदार लकड़ी तस्कर सलाखों के पीछे होंगे। यह सिर्फ लकड़ी की चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध है जिसने अमलाई की साख को दांव पर लगा दिया है।
बड़ी बातें:
30 मिनट: का अविश्वसनीय समय लोडिंग-अनलोडिंग के लिए।
करोड़ों का बोनस: किसानों के नाम पर माफिया की जेब में।
जांच की आंच: जीएसटी और आयकर विभाग की टेढ़ी नजर।
मिलीभगत: मिल के सुरक्षा और वजन विभाग की संदिग्ध भूमिका।

