मध्यप्रदेश

बरगवां में जन्मोत्सव की धूम: श्रद्धा और उल्लास के साथ पूजे गए भगवान परशुराम, भव्य भंडारे में उमड़ा जनसैलाब

 

अमलाई/अनूपपुर। नगर परिषद बरगवां-अमलाई के वार्ड क्रमांक 3 में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भगवान श्री परशुराम जी का जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सोडा फैक्ट्री गेट के समीप स्थित विवेक पाण्डेय के निज निवास पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में क्षेत्र के सैकड़ों सनातन प्रेमियों ने शिरकत की। सुबह से ही समूचा वातावरण शंखध्वनि और ‘जय परशुराम’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा।

विधिवत पूजन एवं हवन से हुआ शुभारंभ

जन्मोत्सव कार्यक्रम का आगाज सुबह 11 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। पंडितों के सानिध्य में यजमान एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान परशुराम जी के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। इसके पश्चात विश्व कल्याण की कामना के साथ हवन-पूजन संपन्न हुआ। आहुतियों के साथ वातावरण में फैली धूप-सामग्री की सुगंध ने क्षेत्र को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया।

संगोष्ठी: आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

पूजन के उपरांत आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने भगवान परशुराम के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। वरिष्ठजनों ने संबोधित करते हुए कहा कि भगवान परशुराम केवल ब्राह्मण समाज के नहीं, बल्कि पूरी मानवता के रक्षक और न्याय के प्रतीक हैं। उन्होंने शस्त्र और शास्त्र के समन्वय का जो मार्ग दिखाया, वह आज के समय में भी प्रासंगिक है। वक्ताओं ने समाज में एकता और धार्मिक जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर बल दिया।

प्रसाद वितरण एवं भव्य भंडारा

धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहूति के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। दोपहर से शुरू हुआ यह भंडारा देर शाम तक चलता रहा, जिसमें क्षेत्र के वार्ड वासियों, राहगीरों और श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन की सुव्यवस्थित व्यवस्था और आत्मीयता की उपस्थित जनों ने भूरी-भूरी सराहना की।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विवेक पाण्डेय एवं विमला पाण्डेय की मुख्य भूमिका रही, जिनके प्रति स्थानीय जनों ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में माताएं, बहनें, युवा और वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। सुरक्षा और व्यवस्था की दृष्टि से स्थानीय युवाओं की टोली सक्रिय रही, जिससे आयोजन निर्विघ्न संपन्न हुआ।

खास बात: > “ऐसे आयोजन न केवल हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि आपसी भाईचारे और सद्भाव को भी मजबूती प्रदान करते हैं।” — आयोजन समिति

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