RAJGARH

शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय राजगढ़ में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का हुआ आयोजन

 

राजगढ़ शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय राजगढ़ द्वारा महिला वैज्ञानिक विकसित भारत की उत्प्रेरक थीम के अंतर्गत राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 का आयोजन उत्साहपूर्वक सम्पन्न किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग नई दिल्ली तथा मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद भोपाल के सहयोग से आयोजित हुआ। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती नेहा पाण्डेय, व्याख्याता (ई.टी.) द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संसाधन व्यक्ति के रूप में प्रो. डॉ. सुरेश सुन्दरमूर्ति (एफ.आई.ई., एफ.एस.ई.ई.एम., एफ.आई.आई.सी.एच.ई.), विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर प्रभारी, केंद्रीय अनुसंधान सुविधा एवं सीएसआर प्रकोष्ठ, रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग, मैनिट भोपाल उपस्थित रहे। उन्होंने “कोनिकल फ्लास्क से स्वदेशी तकनीकी नवाचार एवं पहल (परिवर्तन भारत 2047)” विषय पर विस्तृत एवं प्रेरक व्याख्यान प्रस्तुत किया।

उन्होंने प्रयोगशाला में किए जाने वाले आधारभूत अनुसंधान (कोनिकल फ्लास्क से प्रारंभ होने वाले प्रयोगों) से लेकर उन्हें समाजोपयोगी एवं स्वदेशी प्रौद्योगिकी में रूपांतरित करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब शैक्षणिक संस्थान अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता को समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़ेंगे। प्रो. सुन्दरमूर्ति ने विशेष रूप से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “विज्ञान में महिलाएँ: विकसित भारत की उत्प्रेरक” थीम केवल एक नारा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में ठोस पहल है। उन्होंने छात्राओं को अनुसंधान, नवाचार एवं स्टार्टअप आधारित तकनीकी विकास में आगे आने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने विभिन्न स्वदेशी तकनीकी नवाचारों एवं शोध परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिनमें प्रकाश अभिक्रियक प्रौद्योगिकी, औद्योगिक अपशिष्ट जल से रंग हटाने हेतु नवीन सामग्री, संकर एकल ढाल सौर आसवन यंत्र, आसवनी अपशिष्ट जल उपचार हेतु उन्नत ऑक्सीकरण तकनीक, सूक्ष्मजीव ईंधन कोशिका, पायलट स्तर जैवगैस अपघटक, टिन ऑक्साइड आधारित प्रकाश उत्प्रेरक द्वारा हाइड्रोजन उत्पादन, कीचड़ से ऊर्जा प्रणाली, खाद्य अनुप्रयोग हेतु प्रतिजैविक-प्रतिऑक्सीडेंट जैवपर्दा परत, पारिस्थितिकी ईंटें, भूझिल्ली तथा जैवद्रव्य अपघटन प्रणाली जैसी पर्यावरण अनुकूल एवं समाजोपयोगी तकनीकें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ये तकनीकें ऊर्जा सुरक्षा, जल शुद्धिकरण, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

कार्यक्रम के अंतर्गत श्री सी. वी. रमन के जीवन एवं “रमन प्रभाव” पर विशेष प्रस्तुति, मॉडल प्रदर्शनी, “नाटक में विज्ञान” तथा पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

समापन अवसर पर प्रो. डॉ. सुरेश सुन्दरमूर्ति का आभार व्यक्त करते हुए प्राचार्य श्री राजू जैतवार ने बताया कि उनके व्याख्यान ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार की भावना एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण को सुदृढ़ किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती नेहा पाण्डेय, व्याख्याता (ई.टी.) द्वारा किया गया। अंत में प्रतिभागियों एवं विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी, ज्ञानवर्धक एवं विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में मार्गदर्शक सिद्ध हुआ।

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