भटीगवां खुर्द की बेटियों ने बदली गांव की तस्वीर, कोई उड़ा रही ड्रोन तो कोई चला रही ई-रिक्शा आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहीं किसान दीदियां कभी सीमित संसाधनों के बीच जीवन बिताने वाली ग्रामीण महिलाएं आज बन रहीं मिसाल

भोपाल :
किसी गांव की असली तरक्की तब दिखाई देती है, जब वहां के लोगों की जिंदगी बदलने लगे, महिलाओं के हाथों को रोजगार मिले, बच्चों को बेहतर शिक्षा की सुविधाएं मिलें और किसान आधुनिक तकनीक के सहारे अपनी मेहनत का बेहतर परिणाम हासिल करने लगें। प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी दिशा में शहडोल जिले की मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा से लगे भटीगवां खुर्द पंचायत में बदलाव की एक प्रेरक तस्वीर सामने आ रही है। यहां की किसान दीदियों ने साबित कर दिया है कि अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिले तो गांव की महिलाएं भी आसमान में ड्रोन उड़ा सकती हैं, सड़कों पर ई-रिक्शा चला सकती हैं और आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से अपनी तथा दूसरे किसानों की जिंदगी आसान बना सकती हैं।
प्रदेश सरकार की ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की भावना को धरातल पर साकार करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा भी आजीविका की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने भटीगवां खुर्द पहुंचकर महिलाओं द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया और उनके हुनर, आत्मविश्वास एवं मेहनत की सराहना की। प्रशासन का प्रयास है कि ग्रामीण महिलाएं केवल योजनाओं की हितग्राही बनकर न रहें, बल्कि रोजगार के नए अवसरों से जुड़कर गांव की आर्थिक प्रगति में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं।
इस बदलाव को आगे बढ़ाने में प्रदान संस्था द्वारा आदित्य बिरला कैपिटल फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से भी विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन प्रयासों के माध्यम से कृषि, ऊर्जा, शिक्षा, परिवहन, पशुपालन और डिजिटल सुविधाओं को गांव के परिवारों तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
शकुंतला ने थामा ड्रोन का नियंत्रण, खेतों में लिखने लगीं नई इबारत
गांव की किसान दीदी शकुंतला इस बदलाव की सबसे प्रेरक तस्वीर हैं। उन्होंने इंदौर से ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब ड्रोन के माध्यम से खेतों में खाद एवं कीटनाशक का छिड़काव कर रही हैं। जिस काम में पहले अधिक समय और मेहनत लगती थी, उसे अब कम समय में बड़े क्षेत्र में पूरा किया जा सकता है। इससे किसानों को सुविधा मिलने के साथ शकुंतला के लिए आय का नया साधन भी विकसित हुआ है।
जब कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल गांव पहुंचे और शकुंतला को ड्रोन से खेतों में छिड़काव करते देखा, तो उन्होंने इस पहल की सराहना की। शकुंतला के लिए ड्रोन केवल एक मशीन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और अपनी पहचान बनाने का माध्यम बन गया है।
गौरी के ई-रिक्शा से गांव को मिली रफ्तार, चंद्रवती ने मशीन से आसान की किसानों की राह
गौरी सिंह ने ई-ऑटो रिक्शा की कमान अपने हाथों में लेकर रोजगार का नया रास्ता बनाया है। वे गांव के लोगों को बाजार और अन्य आवश्यक स्थानों तक पहुंचाने में मदद कर रही हैं। इस काम से उन्हें प्रतिदिन लगभग 500 रुपये तक की आमदनी हो रही है। उनके ई-रिक्शा से गांव के दूसरे लोगों को भी परिवहन की सुविधा मिल रही है।
इसी तरह चंद्रवती सिंह रीपर मशीन के माध्यम से धान और गेहूं की कटाई का कार्य कर रही हैं। पंचायत में उपलब्ध दो रीपर मशीनों से आसपास के गांवों के किसान परिवारों को भी लाभ मिल रहा है। कभी पारंपरिक कृषि कार्यों तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज आधुनिक कृषि यंत्रों का संचालन कर रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं।
200 परिवारों के घरों तक पहुंची सौर रोशनी, गांव में बढ़ीं सुविधाएं
गांव में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए 200 परिवारों को सोलर लाइट उपलब्ध कराई गई है। इससे ग्रामीण परिवारों को सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश की सुविधा मिल रही है। एक डिजिटल दीदी को कंप्यूटर सेटअप उपलब्ध कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को ऑनलाइन आवेदन भरने जैसे कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। दो प्रिंटर की व्यवस्था से फोटो कॉपी और प्रिंट की सुविधा भी गांव में ही उपलब्ध हो रही है।
बच्चों की शिक्षा और विद्यालयों की सुरक्षा को भी महत्व दिया गया है। भटीगवां कला माध्यमिक विद्यालय में चार सुरक्षा कैमरे लगाए गए हैं, वहीं भटीगवां खुर्द के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई को अधिक रोचक और आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध कराया गया है।
70 प्रतिशत परिवारों ने अपनाई जैविक खेती, मिट्टी और सेहत बचाने की पहल
गांव के लगभग 70 प्रतिशत परिवार जैविक खेती से जुड़ चुके हैं। रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर कम लागत में बेहतर खेती करने की दिशा में परिवार आगे बढ़ रहे हैं। यह पहल मिट्टी की सेहत और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
फलदार पौधों के रोपण को आसान बनाने के लिए गड्ढा खोदने वाली मशीन और फसलों की कतार में बुवाई करने के लिए एक सीड ड्रिल मशीन उपलब्ध कराई गई है। इन कृषि यंत्रों से किसानों का श्रम और समय बच रहा है तथा खेती में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है।
70 परिवारों के लिए बकरी पालन बना अतिरिक्त आमदनी का सहारा
ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए उन्नत बकरी पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गांव में पांच पक्के बकरी शेड उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि बकरियों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल सके तथा बीमारियों का खतरा कम हो। इसके साथ ही 70 परिवारों को उन्नत बकरी पालन से जोड़ा गया है। उन्हें बकरियों के टीकाकरण, कृमिनाशक दवा देने, बीमारियों की पहचान और प्राथमिक घरेलू उपचार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों को पशुपालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।
सरकार की मंशा, प्रशासन के प्रयास और संस्थागत सहयोग से संवर रही गांव की तस्वीर
भटीगवां खुर्द में हो रहे ये प्रयास बताते हैं कि ग्रामीण विकास का अर्थ केवल सड़क, भवन और अन्य निर्माण कार्य नहीं, बल्कि लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करना भी है। प्रदेश सरकार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मंशा, जिला प्रशासन की सक्रियता तथा प्रदान संस्था और आदित्य बिरला कैपिटल फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से गांव में आजीविका, कृषि, शिक्षा, परिवहन, ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि महिलाएं स्वयं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ आसपास की अन्य महिलाओं को भी आयमूलक गतिविधियों से जोड़ें। उन्हें प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में सहयोग करें। महिलाओं के कौशल और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है।
अब गांव की महिलाएं केवल बदलाव देख नहीं रहीं, बदलाव की अगुवाई कर रही हैं
भटीगवां खुर्द की कहानी इस बात का खूबसूरत उदाहरण है कि जब सरकार की योजनाओं का लाभ गांव तक पहुंचे, प्रशासन मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दे तथा संस्थागत सहयोग से संसाधन उपलब्ध हों, तो ग्रामीण महिलाओं के सपनों को नई उड़ान मिलती है। शकुंतला के हाथों में ड्रोन का नियंत्रण हो या गौरी के हाथों में ई-रिक्शा की कमान, चंद्रवती के हाथों में रीपर मशीन हो या जैविक खेती की ओर बढ़ते किसान परिवार, हर पहल आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही है।
भटीगवां खुर्द अब उस बदलाव का प्रतीक बन रहा है, जहां महिलाओं की मेहनत से परिवारों की खुशहाली बढ़ रही है, बच्चों के भविष्य को नई दिशा मिल रही है और सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। सचमुच, यहां की किसान दीदियां अपने हुनर, हौसले और मेहनत से आत्मनिर्भर गांव का सपना साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


