तबाही’ ने बदल दी अजनार नदी की तस्वीर: न तैरना आता था, न संसाधन थे, फिर भी अकेले शुरू की सफाई; आनंद महिंद्रा से लेकर CM मोहन यादव और केविन पीटरसन तक ने की तारीफ

राजगढ़. अजनार नदी के किनारे रोज एक लड़का पहुंचता था। हाथ में कोई बड़ी मशीन नहीं, तैरना भी नहीं आता था, लेकिन नदी से कचरा निकालने का जुनून जरूर था। शुरुआत में लोगों ने इसे सनक समझा, किसी ने मजाक उड़ाया तो किसी ने इसे बेकार की कवायद बताया। मगर ब्यावरा का 21 वर्षीय बिट्टू अपने इरादे पर कायम रहा। दिन बीतते गए और नदी से निकलता कचरा बढ़ता गया। बिट्टू की मेहनत की तस्वीरें सोशल मीडिया तक पहुंचीं तो कहानी ब्यावरा से निकलकर देश-दुनिया तक जा पहुंची। उद्योगपति आनंद महिंद्रा और मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत कई लोगों ने उसके प्रयास की सराहना की। यहां तक कि नीदरलैंड की पर्यावरण संस्था ‘द ओशन क्लीनअप’ के सीईओ बोयान स्लाट ने भी उसकी मुहिम से प्रभावित होकर उसे अपने साथ काम करने का ऑफर दे दिया।
बिट्टू राजगढ़ जिले के ब्यावरा में रहते हैं और बीएससी सेकंड ईयर में बायोलॉजी की पढ़ाई कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने अपना नाम ‘बिट्टू तबाही’ रखा है। इस नाम के पीछे भी उनकी एक दिलचस्प सोच है। वे बताते हैं, ‘तबाही नाम थोड़ा अटपटा है, इसलिए सोचा कि अच्छे कामों में ही तबाही मचाई जाए।’
हाथ-पैर में हुआ त्वचा का गंभीर संक्रमण, फिर भी डटा रहा
खास बात यह है कि नदी में सफाई के दौरान वे गंभीर रूप से बीमार भी पड़े, उनके हाथ-पैरों में त्वचा का गंभीर संक्रमण भी हुआ लेकिन इससे उनका हौसला कम नहीं हुआ। उन्होंने और उनके कुछ दोस्तों ने मिलकर पैसे जुटाए और लगभग 30,000 खर्च कर सफाई के औजार खरीदे व कचरा हटाने के लिए जेसीबी मशीन भी लगवाई। बिट्टू को हाल ही में सीएम मोहन यादव ने भी सम्मानित किया है।
आनंद महिंद्रा और केविन पीटरसन ने की तारीफ
जब अजनार नदी की सफाई में बिट्टू जुटा, तब लोगों ने उसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। हालांकि, इसी के बीच 30 मार्च को उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने बिट्टू का वीडियो शेयर किया। उसमें उन्होंने आलोचना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर लाइक्स पाने की चाहत में किसी अच्छे काम का जरिए बन सकती है, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है। इस दौरान उन्होंने बिट्टू को अपना आदर्श भी बताया।
इधर, केविन पीटरसन ने इंस्टाग्राम पर बिट्टू की पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि मैंने आज सुबह यह कहानी पढ़ी और सोचा कि इसे आपके साथ साझा करना चाहिए शाबाश, भाई! 20 साल की उम्र में बिट्टू तबाही एक प्रदूषित नदी में उतर गए। न हाथों में दस्ताने थे, न पैरों में जूते और न ही उन्हें तैरना आता था। फिर भी उन्होंने अकेले ही नदी की सफाई शुरू कर दी। 26 जनवरी 2026 को मध्य प्रदेश के ब्यावरा में एक मंदिर के पास बीएससी के छात्र बिट्टू ने अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया। नदी के कुछ हिस्से कचरे के ढेर में तब्दील हो चुके थे। बिट्टू ने वहां से प्लास्टिक और अन्य कचरा निकालना शुरू किया। उन्होंने पूजा सामग्री से निकलने वाले कचरे को खाद में बदलने की पहल भी की और दोस्तों के साथ मिलकर पैसे जुटाकर सफाई के औजार और कूड़ेदान खरीदे। इस अभियान पर करीब 30 हजार रुपये खर्च हुए। एक समय तो उनके हाथों में संक्रमण भी हो गया, लेकिन उन्होंने सफाई का काम नहीं छोड़ा।
जल प्रदूषण के लिए विनाश है बिट्टू
इसके बाद उनकी मुहिम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर हजारों लोगों तक पहुंचे। कुछ लोगों ने उन पर लाइक्स और लोकप्रियता के लिए यह सब करने का आरोप भी लगाया। बिट्टू के उपनाम ‘तबाही’ का अर्थ विनाश होता है। लेकिन आज वह किसी और चीज की तबाही के लिए जुटे हैं- जल प्रदूषण के विनाश के लिए। क्योंकि कई बार बदलाव की शुरुआत तब होती है, जब कोई एक व्यक्ति दूसरों का इंतजार करना छोड़कर खुद पहला कदम उठा लेता है। मेरी नजर में बिट्टू एक असली हीरो हैं। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और सम्मान के हकदार हैं!
सीएम मोहन यादव ने भी की तारीफ
सीएम डॉ मोहन यादव ने एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि बिट्टू ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प से सिर्फ अजनार नदी की सफाई ही नहीं की, बल्कि अपने प्रयासों से समाज को यह संदेश भी दिया है कि बदलाव के लिए बड़ी भीड़ नहीं, एक सच्ची पहल ही काफी है। आपकी यह पहल जल गंगा संवर्धन अभियान की भावना को भी मजबूत करती है, जिसका मूल उद्देश्य जनभागीदारी के साथ जल स्रोतों का संरक्षण एवं उनका पुनर्जीवन है। मुझे विश्वास है कि अजनार नदी से शुरू हुआ आपका यह संकल्प प्रदेश के युवाओं को अपने आसपास के जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित करेगा। पूरे प्रदेश को आप पर गर्व है


