Breaking News

मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान 29 अगस्त को  जनकल्याणकारी योजनाओं की होगी मैदानी समीक्षा

राजगढ़ के शासकीय हाई स्कूल सोनखेड़ा कलां में जनसहयोग, नवाचार और समर्पित शिक्षकों के प्रयासों से शिक्षा का ऐसा सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है, जिसने विद्यालय को जिले के उत्कृष्ट शासकीय विद्यालयों की श्रेणी में पहचान दिलाई है। जिला मुख्यालय से लगभग 29 किलोमीटर दूर स्थित शासकीय हाई स्कूल सोनखेड़ा कलां में कक्षा 9वीं एवं 10वीं का संचालन किया जाता है। विद्यालय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समावेशी शिक्षा, जीवन कौशल, पर्यावरण शिक्षा, करियर काउंसलिंग तथा सतत एवं व्यापक अधिगम मूल्यांकन जैसी गतिविधियों को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।

*मुश्किल दौर से बदलाव की शुरुआत*

वर्ष 2021-22 में विद्यालय में चोरी की घटना के बाद आवश्यक संसाधनों की कमी सामने आई। ऐसे समय में विद्यालय के शिक्षकों ने समस्या को चुनौती मानते हुए जनसहयोग का रास्ता अपनाया। शिक्षकों, ग्रामीणों, पालकों, मित्रों और प्रदेश के सहयोगकर्ताओं से संपर्क कर सहयोग राशि जुटाई गई। अब तक 3 लाख रुपये से अधिक का जनसहयोग प्राप्त हुआ, जिसका उपयोग विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करने में किया गया। जनसहयोग से विद्यालय में पंखे, स्मार्ट क्लास, राजा भोज पुस्तकालय, माता सरस्वती मंदिर तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। विद्यालय की पुस्तकालय व्यवस्था को नई दिशा देने में पुस्तक भवन नई दिल्ली, राष्ट्रीय कवि हरिओम पंवार के सहयोग से संचालित वाणी फाउंडेशन तथा अनुपम फाउंडेशन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

*पर्यावरण संरक्षण बना विद्यार्थियों का संस्कार*

विद्यालय के इको क्लब एवं पर्यावरण मित्र क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया। विवाह वर्षगांठ एवं जन्मदिन जैसे अवसरों पर लोगों से पौधे और उनकी सुरक्षा के लिए जालियां सहयोग स्वरूप प्राप्त की गईं। इसके परिणामस्वरूप विद्यालय परिसर एवं आसपास के विभिन्न पार्कों में लगभग 1000 पौधों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। कारगिल पार्क, नवग्रह पार्क, रानी लक्ष्मीबाई पार्क सहित विद्यालय परिसर में विकसित हरित क्षेत्र विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण शिक्षा की जीवंत प्रयोगशाला बन गए हैं। वर्ष 2026 में देवी अहिल्या बाई पार्क का निर्माण भी इसी सकारात्मक पहल की एक नई कड़ी है।

*शिक्षा के साथ संस्कार और जागरूकता*

विद्यालय में विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए समय-समय पर जागरूकता रैली, जल जीवन अभियान, ऊर्जा संरक्षण, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, योग, कहानी प्रस्तुतीकरण तथा विभिन्न सामाजिक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करने के लिए बाल कैबिनेट का गठन किया गया है। विद्यार्थियों को देश के स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन, संघर्ष और योगदान से परिचित कराने के लिए उनकी जयंती एवं महत्वपूर्ण दिवसों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

*लगातार उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम*

विद्यालय में भयमुक्त वातावरण और ‘खेल-खेल में शिक्षा’ की अवधारणा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। शिक्षकों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि वर्ष 2021-22 से सत्र 2025-26 तक विद्यालय का बोर्ड परीक्षा परिणाम लगभग 97 प्रतिशत रहा है। लगातार चार वर्षों से विद्यालय का नाम जिले के शीर्ष 10 शासकीय विद्यालयों में शामिल रहा है। बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों का भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। विद्यालय द्वारा किए गए प्रयासों से गांव में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के प्रति जागरूकता बढ़ी है और आज ग्रामीण समाज शिक्षा एवं बेटियों के भविष्य को लेकर अधिक सजग हुआ है।

*“लोगों का विश्वास जीतना ही सबसे बड़ी सफलता”*

विद्यालय के शिक्षक श्री ओमप्रकाश जायसवाल बताते हैं कि शासकीय विद्यालय को बेहतर ढंग से संचालित करने और ग्रामीणों एवं पालकों का सरकारी स्कूल के प्रति विश्वास मजबूत करने के उद्देश्य से जनसहयोग की पहल शुरू की गई थी। शुरुआत में कठिनाइयां आईं, लेकिन जब विद्यालय में धरातल पर सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा तो लोगों ने स्वयं आगे बढ़कर सहयोग करना शुरू किया। वे कहते हैं कि इस बदलाव में प्राचार्य, सभी शिक्षकों, मित्रों, पालकों और ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आज विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएं, पर्यावरण संरक्षण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

*जनसहयोग बना बदलाव की ताकत*

शासकीय हाई स्कूल सोनखेड़ा कलां की कहानी इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि जब शासन की योजनाओं के साथ शिक्षक का समर्पण, समुदाय का विश्वास और जनसहयोग जुड़ता है, तो सीमित संसाधनों वाला विद्यालय भी उत्कृष्टता की नई मिसाल कायम कर सकता है।यह विद्यालय अब केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी का प्रेरणादायी केंद्र बनकर उभर रहा है।

Related Articles

Back to top button