प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, राजगढ़ में प्राकृतिक खेती पर कार्यशाला आयोजित

राजगढ़, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजगढ़ में मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस अभियान के अंतर्गत आयोजित जनकल्याणकारी गतिविधियों की श्रृंखला में “प्राकृतिक खेती” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं नागरिकों को प्राकृतिक खेती के महत्व तथा रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वी.बी. खरे, मुख्य वक्ता श्री गोविंद नागर, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. रजनी खरे, कार्यक्रम संयोजक एवं जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना डॉ. शैलेंद्र कुमार मेवाड़े तथा अन्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
कार्यक्रम का संचालन अतिथि विद्वान सुश्री आराधना यादव ने किया। विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला का निर्देशन सहायक प्राध्यापक डॉ. लुकमान मंसूरी ने किया। इस अवसर पर वाणिज्य विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री प्रकाश कुमार अहिरवार ने प्राकृतिक खेती पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया तथा विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती अपनाने की शपथ दिलाई।
मुख्य वक्ता श्री गोविंद नागर ने अपने उद्बोधन में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक खेती को समय की आवश्यकता बताते हुए इसके पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी लाभों पर प्रकाश डाला। प्राचार्य डॉ. वी.बी. खरे ने भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा रासायनिक पदार्थों के अंधाधुंध प्रयोग से बचने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान शासन द्वारा संचालित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) सर्वेक्षण के संबंध में डॉ. शैलेंद्र कुमार मेवाड़े ने विद्यार्थियों को जानकारी प्रदान की तथा उन्हें मोबाइल के माध्यम से अपने सुझाव दर्ज करने के लिए प्रेरित किया।
अंत में डॉ. लुकमान मंसूरी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यशाला में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।यह संस्करण समाचार-पत्र एवं जनसंपर्क विभाग की शैली के अनुरूप संक्षिप्त, औपचारिक और प्रकाशन योग्य है।


