मधुबनी की प्रीति झा मिथिला पेंटिंग से बनीं आत्मनिर्भर

झंझारपुर (SHABD) :मिथिला की पावन भूमि पर सदियों पुरानी कला और संस्कृति की परंपरा आज भी जीवंत है। विश्व प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग न केवल सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनी हुई है, बल्कि अब यह स्वरोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम भी बन रही है।
मधुबनी जिले के झंझारपुर प्रखंड अंतर्गत महिनाथपुर पंचायत की प्रीति झा ने मिथिला पेंटिंग सीखकर इसे अपने आजीविका का साधन बना लिया है। प्रीति झा के अनुसार बदलते समय के साथ यह पारंपरिक कला अब बाजार की मांग के अनुरूप नई पहचान प्राप्त कर रही है। उन्होंने बताया कि साड़ी और खादी के कपड़ों पर बनी मिथिला पेंटिंग की देश के विभिन्न राज्यों से लगातार मांग बढ़ रही है, जिससे उन्हें बेहतर आय भी प्राप्त हो रही है।
प्रीति झा ने बताया कि यह कला महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का एक सशक्त माध्यम बन सकती है। उन्होंने अपने गांव की 20 से अधिक महिलाओं को मिथिला पेंटिंग का प्रशिक्षण देना शुरू किया है, ताकि वे भी इसे स्वरोजगार के रूप में अपना सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
बीएड डिग्रीधारी प्रीति ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन परिवार के सहयोग और निरंतर प्रयास से आज वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। उन्होंने कहा कि अब वे न केवल स्वयं आजीविका चला रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ने का कार्य कर रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है।




