RAJGARH

कैसे बदली पढ़ाई की तस्वीर, नवाचार, डिजिटल शिक्षा और निरंतर मेहनत से बदला ग्रामीण विद्यालय का परीक्षा परिणाम

 

राजगढ शासकीय हाईस्कूल पाड़ल्याखेड़ी के माध्यमिक शिक्षक (गणित) एवं संस्था प्रभारी प्राचार्य श्री मुकेश नागर का चयन लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश द्वारा राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार (राज्यपाल पुरस्कार) के लिए किया गया है। उन्हें 8 सितंबर को राजभवन में सम्मानित किया जाएगा। श्री नागर ने वर्ष 2007 में विद्यालय में पदस्थापना के बाद शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के लिए निरंतर नवाचार किए। उस समय विद्यालय का कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम शून्य से 10 प्रतिशत के बीच था। उनके प्रयासों से विद्यालय का परीक्षा परिणाम पिछले वर्षों में 80 से 96.88 प्रतिशत तक पहुंचा। वर्ष 2021 में विद्यार्थी जितेंद्र सौंधिया ने गणित में 100 में से 100 अंक तथा वर्ष 2025 में विद्यार्थी अंकित सौंधिया ने 99 अंक प्राप्त किए।
डिजिटल नवाचार से गणित शिक्षा को बनाया सरल
एम.एससी. गणित की शैक्षणिक योग्यता रखने वाले श्री नागर ने कक्षा 10वीं के लिए ब्लूप्रिंट एवं अध्याय आधारित डिजिटल क्विज प्रोग्राम, यूनिटवार डिजिटल लेसन प्लान तथा मॉडल टेस्ट पेपर तैयार किए। इनमें विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्नों को भी शामिल किया गया। उनके द्वारा विकसित शैक्षणिक सामग्री का उपयोग राजगढ़ जिले के 216 शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में किया जा रहा है।

*शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय भूमिका*

ग्रामीण क्षेत्र में बालिकाओं की शिक्षा जारी रखने तथा बाल विवाह की रोकथाम के लिए श्री नागर ने अभिभावकों से निरंतर संवाद और काउंसलिंग की। उनके अनुसार, पिछले 18 वर्षों में गांव में किसी भी बेटी का बाल विवाह नहीं हुआ। उन्होंने ‘रुक जाना नहीं’ एवं ओपन बोर्ड जैसी योजनाओं के माध्यम से 40 से अधिक ड्रॉपआउट विद्यार्थियों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कमजोर विद्यार्थियों के लिए जुलाई-अगस्त से ही निदानात्मक कक्षाएं संचालित की जाती हैं। परीक्षा से पूर्व रविवार को अतिरिक्त कक्षाएं एवं टेस्ट भी आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थियों की अनुपस्थिति पर उनके घर जाकर अभिभावकों से संवाद कर उन्हें नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित किया जाता है।

*विद्यालय को बनाया हरित एवं संसाधन सम्पन्न परिसर*

प्रशासन के सहयोग से विद्यालय की भूमि से अतिक्रमण हटवाकर लगभग 98,663 वर्गफीट परिसर को सुरक्षित किया गया। विद्यालय परिसर में पांच वाटिकाएं विकसित कर बरगद, पीपल, नीम एवं आंवला सहित 500 से अधिक पौधे लगाए गए। पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के क्षेत्र में विद्यालय को ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय मूल्यांकन 2025-26’ में जिले में प्रथम स्थान एवं 4-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई। सांसद निधि एवं भारत पेट्रोलियम के सीएसआर सहयोग से विद्यालय में आधुनिक आईटी लैब स्थापित की गई। एक हजार से अधिक पुस्तकों से सुसज्जित ‘वीणावादिनी पुस्तकालय’ भी विकसित किया गया। ‘मेरी शाला मेरा गौरव’ अभियान के तहत श्री नागर ने ट्यूबवेल, कंप्यूटर एवं प्रिंटर के लिए स्वयं 46 हजार रुपये का योगदान दिया। विद्यार्थियों के प्रोत्साहन के लिए ‘कमल प्रतिभा रत्न पुरस्कार’ भी शुरू करवाया गया।
श्री नागर गणित, आईसीटी, पुस्तकालय सशक्तिकरण, करियर काउंसलिंग एवं योग के राज्य एवं संभाग स्तरीय मास्टर ट्रेनर भी हैं। वर्ष 2022 एवं 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में कलेक्टर, राजगढ़ द्वारा उन्हें शैक्षणिक नवाचार, बाल विवाह रोकथाम एवं उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम के लिए जिला स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। श्री मुकेश नागर ने कहा कि ग्रामीण परिवेश में शून्य परिणाम वाले विद्यालय को बेहतर बनाना तथा बच्चों, विशेषकर बेटियों को शिक्षा से जोड़ना ही उनके जीवन का प्रमुख ध्येय रहा है।

*समा क्रं./001/1506/09/2026 ……..00……. फोटो क्रं. 01*

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