स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहीं किला अमरगढ़ की महिलाएं 65 महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, 30 से अधिक महिलाएं स्वयं का व्यवसाय संचालित कर बढ़ा रहीं परिवार की आय

राजगढ़ जिले के किला अमरगढ़ गांव में स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। आजीविका मिशन के माध्यम से समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्वरोजगार, बैंक ऋण एवं व्यवसाय संचालन के लिए मार्गदर्शन और सहयोग मिलने से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। गांव के 6 सक्रिय स्व-सहायता समूहों से जुड़ी 65 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। ये महिलाएं स्वयं का व्यवसाय संचालित कर प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। इनमें 30 से अधिक महिलाएं सिलाई, किराना, कपड़ा, बर्तन, सिलाई-कढ़ाई, होटल, मिनी मेडिकल, जूता-चप्पल तथा मोटर बॉडी निर्माण सहित विभिन्न व्यवसायों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं।
*बैंक ऋण से मिला स्वरोजगार को विस्तार*
आजीविका मिशन की टीम एवं सीआरपी द्वारा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से निरंतर संपर्क कर उनकी रुचि, क्षमता एवं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार की जाती है। इसके बाद महिलाओं को बैंक से ऋण उपलब्ध कराने में सहयोग किया जाता है।
अमरगढ़ के स्व-सहायता समूहों को विभिन्न बैंकों के माध्यम से एक करोड़ रुपये से अधिक का बैंक ऋण उपलब्ध हो चुका है। समूहों की महिलाएं निर्धारित समय पर ऋण की किश्तों का भुगतान कर वित्तीय अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।
*मधु की कहानी बनी प्रेरणा*
अमरगढ़ गांव की मधु मां फलोदी स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। मधु ने समूह से जुड़कर बैंक ऋण की सहायता से कपड़े और किराना दुकान का व्यवसाय शुरू किया। आज उनका व्यवसाय अच्छी तरह संचालित हो रहा है और वे अपनी आय बढ़ाकर परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मधु बताती हैं कि उनके स्व-सहायता समूह ने बैंक से लगभग 35 लाख रुपये का ऋण लिया है। समूह से जुड़ने और आजीविका मिशन के मार्गदर्शन से उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। उनका कहना है कि यदि आजीविका मिशन से जुड़ने का अवसर नहीं मिलता तो वे इस मुकाम तक नहीं पहुंच पातीं।
*आत्मनिर्भरता से मजबूत हो रहा परिवार*
स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का अवसर दिया है। महिलाएं अपने घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ व्यवसाय संचालित कर आय अर्जित कर रही हैं।
अमरगढ़ की महिलाओं की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि संगठित प्रयास, बैंकिंग सुविधा, आजीविका मिशन का मार्गदर्शन और महिलाओं की मेहनत मिलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं। आज अमरगढ़ की 65 ‘लखपति दीदी’ न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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