मध्यप्रदेश

हक़ की हुंकार: सोहागपुर कोयलांचल में संयुक्त मोर्चा का ‘महा-संग्राम’, SECL प्रबंधन के खिलाफ आर-पार की जंग!

धनपुरी (शहडोल) असलम बाबा | 11 मार्च 2026 — कोयलांचल की धरती एक बार फिर इंक़लाबी नारों से गूँज उठी है। सोमवार, 9 मार्च से क्षेत्रीय महाप्रबंधक कार्यालय के सामने जो मंजर दिख रहा है, उसने यह साफ़ कर दिया है कि अब मज़दूर सिर्फ काम करना नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ना भी जानते हैं। संयुक्त मोर्चा SECL सोहागपुर क्षेत्र के बैनर तले पाँचों प्रमुख ट्रेड यूनियनों— BMS, AITUC, INTUC, HMS और CITU—ने आपसी मतभेद भुलाकर प्रबंधन की तानाशाही के खिलाफ एक अभेद्य दीवार खड़ी कर दी है।

प्रबंधन की ‘तानाशाही’ पर संयुक्त मोर्चा का प्रहार

धरना स्थल पर मौजूद संयुक्त मोर्चा के रणनीतिकारों के तेवर इतने तीखे हैं कि प्रबंधन के गलियारों में हड़कंप मच गया है। मोर्चा ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि बंद कमरों में बैठकर मज़दूरों के भविष्य का सौदा करना बंद किया जाए। सबसे बड़ा आक्रोश रामपुर बटुरा, अमलाई OCM और धनपुरी OCM के कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर है। संयुक्त मोर्चा का साफ़ कहना है कि किसी भी कर्मचारी को उसकी मर्जी के बिना अन्य क्षेत्रों या भूमिगत खदानों में नहीं भेजा जाएगा, और न ही यहाँ की मशीनों को बाहर ले जाने की साज़िश सफल होने दी जाएगी।

हुंकार: ये मांगें नहीं, हमारा अधिकार हैं!

बैनर पर दर्ज 6 सूत्रीय मांगें केवल शब्द नहीं, बल्कि संयुक्त मोर्चा का वो संकल्प है जिसे पूरा कराए बिना आंदोलन थमेगा नहीं:

स्थानांतरण पर पूर्ण रोक: वाचन वार्ड और अन्य प्रमुख इकाइयों से कर्मचारियों के अनुचित तबादले को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है।

सहमति के बिना सेवा शर्तों में बदलाव नहीं: संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट कर दिया है कि श्रम संघों की लिखित सहमति के बिना किसी भी कर्मचारी की सेवा शर्तों में रत्ती भर भी बदलाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पारदर्शिता का अभाव: क्षेत्र में कार्यरत ठेका कंपनियों जैसे RKTC, जय अम्बे, JMS, और SRK के वर्क ऑर्डर और LOI की कॉपियां अब तक साझा क्यों नहीं की गई? मोर्चा इसे एक बड़ी साज़िश मान रहा है और इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग पर अड़ा है।

मज़दूरों का सम्मान: ठेकेदारी मज़दूरों के शोषण को समाप्त करने के लिए उनकी बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करना अब संयुक्त मोर्चा की प्राथमिकता है।

एकजुटता का शंखनाद: ‘मज़दूर एकता ज़िंदाबाद

यह केवल एक धरना नहीं, बल्कि संयुक्त मोर्चा द्वारा उस सोई हुई व्यवस्था को जगाने का प्रयास है जो मुनाफे की अंधी दौड़ में मज़दूर का पसीना और उसकी मेहनत भूल चुकी है। अलग-अलग विचारधाराओं के झंडों का एक साथ लहराना इस बात का प्रमाण है कि जब बात मज़दूरों के हक और सम्मान की आएगी, तो पूरा सोहागपुर एक मुट्ठी बनकर खड़ा होगा।

“प्रबंधन हमारी शांति को हमारी कमजोरी न समझे। अगर हमारी वाजिब मांगें नहीं मानी गईं, तो कोयलांचल की ये खदानें प्रबंधन की तानाशाही का कब्रिस्तान बनेंगी!” — धरना स्थल पर गूँजता संयुक्त मोर्चा का साझा स्वर।

संयुक्त मोर्चा ने साफ कर दिया है कि यदि समय रहते इन जायज मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो यह शांतिपूर्ण धरना एक उग्र ‘चक्का जाम’ में तब्दील हो जाएगा। उत्पादन ठप होने और होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी SECL प्रशासन और क्षेत्रीय प्रबंधन की होगी। अब गेंद प्रबंधन के पाले में है—या तो वे सम्मान के साथ संवाद का रास्ता चुनें, या फिर मज़दूरों के इस आक्रोश का सामना करने को तैयार रहें।

Related Articles

Back to top button