कोयला मजदूर सभा में बगावत: महामंत्री पर संविधान की ‘हत्या’ का आरोप, प्रभारियों की नियुक्ति पर मचा बवाल
अवैध नियुक्तियों के खिलाफ पंजीयक तक पहुंचा मामला; महामंत्री नाथू लाल पाण्डेय की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल

कोरबा/रायपुर। (असलम बाबा)एसईसीएल (SECL) के सबसे बड़े और प्रभावसाली श्रमिक संगठनों में से एक ‘कोयला मजदूर सभा’ (HMS) के भीतर इस वक्त सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। संगठन के महामंत्री श्री नाथू लाल पाण्डेय द्वारा हाल ही में की गई नियुक्तियों ने संगठन में ‘गृहयुद्ध’ जैसी स्थिति पैदा कर दी है। गेवरा-दीपका और सी.ई.डब्ल्यू.एस. क्षेत्र के पदाधिकारियों ने महामंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर तानाशाही और संगठन के संविधान को ताक पर रखने का आरोप लगाया है। यह विवाद अब नया रायपुर स्थित श्रमिक पंजीयक कार्यालय तक जा पहुंचा है।
संविधान में पद नहीं, फिर भी बना दिए ‘प्रभारी’
पूरे विवाद की जड़ महामंत्री द्वारा 8 अप्रैल 2026 को जारी किया गया वह पत्र है, जिसके माध्यम से उन्होंने एसईसीएल के सभी क्षेत्रों के लिए ‘प्रभारियों’ की नियुक्ति कर दी है। संगठन के स्थानीय नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं का कहना है कि कोयला मजदूर सभा के लिखित संविधान में ‘प्रभारी’ जैसे किसी पद का कोई अस्तित्व ही नहीं है। विरोधियों का स्पष्ट तर्क है कि जब पद ही अस्तित्व में नहीं है, तो उस पर नियुक्ति करना सीधे तौर पर संविधान का उल्लंघन और पंजीयक अधिकारी की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।
अधिनायकवाद का आरोप: न मशविरा, न सहमति
गेवरा-दीपका क्षेत्र के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि महामंत्री ने यह फैसला बंद कमरे में लिया है। किसी भी क्षेत्रीय या शाखा समिति से इस महत्वपूर्ण निर्णय पर कोई राय-मशविरा नहीं किया गया। ज्ञापन में लिखा गया है कि यह ‘एकतरफा और अधिनायकवादी प्रवृत्ति’ का प्रतीक है। श्रमिक नेताओं का कहना है कि जो संगठन मजदूरों के लोकतांत्रिक हक की लड़ाई लड़ता है, उसी के भीतर लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमोदन के प्रभारियों की फौज खड़ी करना संगठन के आपसी सहमति के मूल सिद्धांतों पर गहरा आघात है।
श्रम विभाग और मंत्रालय में शिकायत, आदेश निरस्त करने की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए गेवरा-दीपका क्षेत्र के सदस्यों ने छत्तीसगढ़ शासन के श्रम मंत्री, अध्यक्ष और महामंत्री (HKMF-HMS) को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजी है। मांग की गई है कि 8 अप्रैल के उस ‘असंवैधानिक’ आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन अवैध नियुक्तियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो संगठन की कार्यप्रणाली ठप हो सकती है और इसका सीधा असर कोयला खदानों में कार्यरत मजदूरों के हितों पर पड़ेगा।
संगठन में दोफाड़ की आहट
जानकारों की मानें तो इस विवाद के पीछे संगठन के भीतर सत्ता के केंद्रीकरण की कोशिशें छिपी हैं। प्रभारियों की नियुक्ति को स्थानीय नेतृत्व को कमजोर करने की साजिश के रूप में देखा जा रहा है। कोर कमेटी के सदस्यों का कहना है कि यदि महामंत्री अपने फैसले से पीछे नहीं हटते हैं, तो संगठन में बड़ी टूट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, सभी की नजरें पंजीयक (व्यवसायिक संघ) के अगले कदम पर टिकी हैं।
बड़ी बातें:
तारीख: 8 अप्रैल 2026 को जारी हुआ था विवादित आदेश।
आरोप: संविधान में ‘प्रभारी’ पद का उल्लेख न होने के बावजूद थोपी गई नियुक्तियां।
: श्रम मंत्री और पंजीयक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग।
प्रभाव: गेवरा, दीपका और सी.ई.डब्ल्यू.एस. क्षेत्रों में भारी असंतोष।



