उत्तर प्रदेश

राज्यपाल से कर्नाटक एवं त्रिपुरा राज्य के मीडिया प्रतिनिधि मंडल ने की शिष्टाचार भेंट

लखनऊ : प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से आज जन भवन में प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो के अधिकारियों के नेतृत्व में कर्नाटक एवं त्रिपुरा राज्यों के मीडिया के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की तथा आयोजित संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। संवाद कार्यक्रम में राज्यपाल ने मीडिया प्रतिनिधियों के साथ अपने अनुभवों एवं विभिन्न नवाचारों को साझा किया। शिक्षा के क्षेत्र में ‘केजी टू पीजी’ की अवधारणा पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि तीन वर्ष के बच्चों का आंगनवाड़ी में शत प्रतिशत नामांकन तथा छह वर्ष की आयु वाले सभी बच्चों का कक्षा एक में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने अपने गुजरात के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां घर-घर सर्वेक्षण कर बच्चों के नामांकन को प्रोत्साहित किया जाता था तथा शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को पुस्तकें वितरित की जाती थीं। जिन गांवों में महिलाओं की साक्षरता दर 35 प्रतिशत से कम थी, वहां बालिकाओं के नामांकन पर ‘नर्मदा बॉन्ड’ के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती थी। राज्यपाल जी ने बताया कि शिक्षा में ड्रॉपआउट दर कम करने के लिए विशेष प्रयास किए गए तथा गर्भवती महिलाओं के लिए स्थानीय पोषक आहार ‘सुखड़ी’ तैयार कर वितरित किया जाता था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत नामांकन के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु समन्वित प्रयास किए जाने चाहिए।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राज्य विश्वविद्यालयों की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों ने नैक, एन0आई0आर0एफ0, क्यू0एस0 एशिया एवं क्यू0एस0 वर्ल्ड सहित विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों पर उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 के कोरोना काल में भी विश्वविद्यालयों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठकें की जाती थीं तथा समय-समय पर नैक की तैयारियों की समीक्षा की जाती थी। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए निरंतर परिश्रम, सीखने की प्रवृत्ति और दूसरों को सुनने की आदत अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण विकसित करना चाहिए जहां छात्र-छात्राओं की समस्याओं को सुना जाए और उनके समाधान हेतु कार्य किया जाए।

उत्तर एवं दक्षिण भारत में शिक्षा के स्तर के विषय में उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में पहले शिक्षा के प्रति जागरूकता अपेक्षाकृत कम थी, किंतु अब स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं, जहां लगभग 80 प्रतिशत पदक छात्राओं को प्राप्त हो रहे हैं।
बाल विवाह एवं दहेज प्रथा जैसी सामाजिक समस्याओं पर उन्होंने जागरूकता को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि समाज के प्रबुद्ध एवं जिम्मेदार लोगों को इन कुप्रथाओं के विरुद्ध आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं में शिक्षा का प्रसार और जागरूकता ही इन समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम है। साथ ही सामूहिक विवाह को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

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