*उद्योगों और शिक्षा संस्थानों के बीच कोलोब्रेशन होना जरूरी है —- मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2026 को बताया अनुकूल

इंदौर
सेमीकंडक्टर चिप इंडस्ट्री में मध्यप्रदेश को एक ऐसा इको सिस्टम तैयार करना होगा। जिससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग को नई उडान मिल सकें। मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2026 बहुत अच्छी है। लेकिन प्रदेश को चिप डिजाइन, एडवांस्ड पैकेजिंग, टेस्टिंग, टैलेंट जैसे क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। चिप इंडस्ट्री के क्षेत्र में शोध और नवाचार करने वाले शौधार्थियों को लेबोरेटरी में जाकर प्रयोग कर सीखने की आवश्यकता है। प्रदेश में उद्योगों और शिक्षा संस्थानों के बीच कोलोब्रेशन होना जरूरी है। तभी हम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा सकेंगे। ये विचार विभिन्न सेमीकंडक्टर चिप विनिर्माण के क्षेत्र में काम कर रहे निर्माताओं और विशेषज्ञों के है, जो उन्होंने मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 के समापन अवसर पर आयोजित अंतिम सत्र में कहे। समापन सत्र में प्रो. श्री योगेश चौहान आईआईटी कानपुर, श्री शिवकुमार पी.आर. Maven सिलिकॉन के फाउंडर एवं सीईओ, सुश्री अपराजिता बैनर्जी डॉयरेक्टर 1-TOPS BY VSI, प्रो. एलेक्स पी जेम्स डिजिटल यूनिवर्सिटी केरला, श्री देवेश द्विवेदी डायरेक्टर ग्लोबल फाउंड्राइस और एम.एम. त्रिपाठी डायरेक्टर जनरल NIELIT, MEITY ने सहभागिता की।
अपराजिता बैनर्जी ने कहा कि मध्यप्रदेश में राज्य शासन, नीति निर्माता और चिप निर्माण कंपनियों को एक प्लेटफार्म पर साथ आना होगा। तभी वे प्रदेश को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आगे ले जा सकेंगे। मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिये एक अच्छा वातावरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार हो गया है। यहां अच्छे शिक्षा संस्थान है, आईटी कंपनियां है, कार्पोरेटस हैं, बेहतर सड़कें और कनेक्टिविटी है। साथ ही सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में प्रदेश में विद्यार्थी रूचि दिखा रहे है।
श्री शिवकुमार ने कहा कि भारत की चिप निर्माण कंपनियों को एआई के साथ जुड़कर और अधिक एडवांस होने की आवश्यकता है। एआई के ताकत को हम नकार नहीं सकतें है। इससे काम आसान हो जाता है और तकनीक की दृष्टि से वह बेहतर होता है। हमारे विद्यार्थियों में बुनियादी ज्ञान है और उसे परिष्कृत करने की आवश्यकता है।
समापन सत्र में सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के क्षेत्र में कार्य करने वाले कॉरपोरेटस, इंजीनियर्स, तकनीक विशेषज्ञ एवं शौधार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


