12वां अंतरर्राष्ट्रीय योग दिवस: राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु, राज्यपाल पटेल और सीएम डॉ. यादव ने किया योग, दिया स्वस्थ-संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश –

भोपाल/जबलपुर। 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर देश सहित मध्यप्रदेश की छटा योग के रंग में रंगी दिखाई दी। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर के गैरीसन ग्राउंड पर आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में सहभागिता की। सभी ने योगाभ्यास किया और योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाने, निरोग, स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु और राज्यपाल पटेल को प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया।
इस मौके पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आज हम यहां भारत की उस महान परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने मानवता को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन का मार्ग दिखाया। योग विश्व समुदाय को हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य उपहार है। यह हमारे ऋषियों और मुनियों की हजारों वर्षों की साधना का परिणाम है। हमारे शास्त्रों में शरीर, मौन और आत्मा के संतुलन को जीवन की सफलता का आधार माना गया है। योग उसी संतुलन को स्थापित करने का मार्ग है। योग शब्द का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। ये व्यक्ति को स्वयं से, समाज को प्रकृति से और संपूर्ण मानवता को व्यापक विश्व चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तो योग मानवता को शांति, संतुलन, समरसता और सामूहिक कल्याण का मार्ग दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
*करोड़ों लोग योग को बना रहे दैनिक जीवन का हिस्सा*
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2014 में भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा की। इस पहल से पिछले 12 वर्षों से विश्व कल्याण के एक सशक्त माध्यम के रूप में योग पद्धति की पहचान और मजबूत हुई है। आज विश्व के अनेक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। इसी महीने अहमदाबाद में आयोजित प्रथम वर्ल्ड योगासन स्पोर्ट्स चैंपियनशिप इसका एक अच्छा उदाहरण है। इस आयोजन में कई देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। हम कभी-कभी विदेशों में जाते हैं तो वो लोग योग के बारे में पूछते हैं। क्योंकि, योगाभ्यास विदेशों में भी किया जाता है। मुझे बताया गया है कि इस वर्ष योग की थीम ‘योगा फॉर हेल्दी एजिंग’ है। हम आज जो जीवनशैली अपनाते हैं, वही हमारे आने वाले समय के स्वास्थ्य एवं सुख का आधार बनती है। योग बढ़ती आयु से भी व्यक्ति के सक्रिय और आत्मनिर्भर बने रहने की सहायक होता है। योग मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करता है।
*जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बड़ी चुनौती*
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां हमारे सामने बड़ी चुनौती हैं। आज इन बीमारियों की रोकथाम करने के लिए समग्र चिकित्सा पद्धति का प्रयोग व्यापक रूप से हो रहा है। योग इस पद्धति का अहम हिस्सा है। यह सरल, प्रभावी और सुलभ है। भारत सरकार योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए योग शिक्षण, अनुसंधान और प्रशिक्षण तथा जन-जागरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। यह प्रसन्नता का विषय है कि अनेक संस्थाएं विश्व स्तर पर लोगों को योग के लिए प्रेरित कर रही हैं। मेरा मानना है कि योग से जुड़ी संस्थाओं के प्रयासों के बलबूते पर योग जन-जन तक पहुंचेगा। योग समस्त मानवता के कल्याण का आधार स्तंभ है। मैं इस अवसर पर सभी देशवासियों से यह संकल्प लेने का आग्रह करती हूं कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएं। ऐसा करके वे स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज, स्वस्थ राष्ट्र और स्वस्थ विश्व के निर्माण में योगदान देंगे।
*30 मिनट का योगाभ्यास लाता है सकारात्मक बदलाव*
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ बनाने का माध्यम ही नहीं, बल्कि यह संपूर्ण जीवन को संतुलित, सरल और आनंदमयी बनाने की पद्धति है। भारतीय ज्ञान परंपरा ने स्वस्थ जीवन का जो मार्ग दिखाया था। आज पूरी दुनिया उसे अपना रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा भारतीय योग को अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिया गया। योग को पूरी दुनिया में सम्मान दिखलवाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि और अटूट प्रतिबद्धता के प्रति आभार व्यक्त करना हम सभी का कर्तव्य है। हम मानते हैं कि हर व्यक्ति का जीवन सुखी हो, उसके लिए हमारे तन और मन का स्वस्थ रहना जरूरी है। प्राणायम के जरिए हम केवल सांस नहीं लेते, बल्कि नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच को भी अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि ध्यान हमें अपने अंदर झांकने का अवसर देता है और मन की शांति मिलती है। रोजाना केवल 20 से 30 मिनट का योगाभ्यास, ध्यान और प्राणायम हमारे लिए प्रभावी और सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे सरल माध्यम है।
*वैश्विक शांति और वैश्विक कल्याण को बढ़ावा देता है योग दिवस*
इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस दुनियाभर में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम -योगा फॉर हेल्दी एजिंग है। योग दिवस वैश्विक शांति और वैश्विक कल्याण को बढ़ावा देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के सफलतम 12 वर्ष पूर्ण होने पर यह सुखद संयोग बना है। इस वर्ष राष्ट्रीय कार्यक्रम का नेतृत्व प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नगरी कोलकाता से किया जा रहा है। दुनिया के करीब 2500 स्थानों पर योगाभ्यास किया जा रहा है, 210 से अधिक दूतावास भी कार्यक्रम में हिस्सेदारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने योग के रूप में दुनिया को मानव कल्याण का उपहार सौंपा है। योग का अर्थ है जोड़ना, भारत ने अपने ज्ञान- विवेक और विचार से सदैव सभी को एक-दूसरे से जोड़ा है।
*पीएम मोदी ने योग को बनाया आंदोलन*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा, हमारी आध्यात्मिक चेतना और समृद्ध सनातन संस्कृति का वैश्विक पटल पर परिचय कराया है। जब 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व योग दिवस का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सभा में रखा तो 175 से ज्यादा देशों ने इसका ऐतिहासिक समर्थन किया था। इस वर्ष सामूहिक योग सत्रों में करीब 30 से 35 करोड़ लोग शामिल हो रहे हैं। मध्यप्रदेश के कोने-कोने को योग से जोड़ने के लिए हर घर योग अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया है। उन्होंने आदि देव शंकर और आष्टांग योग के प्रणेता महर्षि पतंजलि को नमन करते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम संस्कारधानी जबलपुर में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हो रहा है।
*हमारी संस्कृति में संसार एक परिवार है*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति ने सदैव संसार को एक परिवार के रूप में देखा है। हमने कभी भौगोलिक सीमाओं तक अपनी सोच को सीमित नहीं किया है, अपितु विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम का अमर संदेश दिया। हमारे ऋषियों ने सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामय: की कामना की। मध्यप्रदेश योगियों की तपोस्थली रही है। भगवान श्री कृष्ण को मध्य प्रदेश की धरती पर योग का ज्ञान प्राप्त हुआ । मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपन्नता गौरवशाली इतिहास का अभिन्न अंग रही है। योगेश्वर श्रीकृष्ण ने उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। यहां उन्होंने 64 कला और 14 विद्याओं का गहन अध्ययन किया। इनमें योग विज्ञान सबसे प्रमुख था। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया के 200 से अधिक देशों में योगाभ्यास हो रहा है। यह भारत की गौरवशाली संस्कृति का प्रतीक है। भारत एक बार फिर दुनिया को हमारी समृद्ध संस्कृति से परिचित करा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के साथ-साथ सूर्य देव की कक्षा परिवर्तन का दिन भी है। आज से सूर्य देव उत्तरायण से दक्षिणायण की ओर से यात्रा प्रारंभ करते हैं।



