महिलाओं-बच्चों का कल्याण प्राथमिकता, सीएम डॉ. यादव बोले- लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई करें

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 जून को मंत्रालय में महिला एवं बाल विकास विभाग के कामों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक से अधिक जन भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। महिलाओं और बच्चों के कल्याण से संबंधित योजनाओं का अधिक से अधिक प्रचार हो। बच्चों और महिलाओं में पोषण स्तर को बेहतर करने के लिए संचालित गतिविधियों में स्वास्थ्य विभाग, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग सहित निजी अस्पतालों और संस्थाओं को भी जोड़ा जाए। इस दिशा में अन्य राज्यों और प्रदेश के जिलों में हो रहे सफल नवाचारों को अपनाने के लिए भी कार्य योजना बनाई जाए ।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैदानी स्तर पर बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहन और लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिन औद्योगिक इकाइयों में महिला कर्मियों की संख्या अधिक है, उन इकाइयों में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल निर्माण की पीपीपी मोड पर कार्य योजना बनाई जाए। बैठक में बताया गया कि देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में वर्किंग वुमेन हॉस्टल का निर्माण प्रारंभ हो गया है। संकटग्रस्त महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने के लिए पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, पेटलावद-झाबुआ, इंदौर के लसूड़िया और सांवेर तथा धार के मनावर और पीथमपुर में वन स्टॉप सेन्टर स्वीकृत किए गए हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन के अंतर्गत 51 जिला स्तरीय और 01 राज्य स्तरीय हेल्प सेंटर के माध्यम से 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता उपलब्ध करवाई गई। जोखिम ग्रस्त बच्चों की मैपिंग के लिए 13 जिलों में प्रक्रिया जारी है।
*5-6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए आयोजित की गई ग्रेजुएशन सेरेमनी*
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 5 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के 9 लाख 28 हजार बच्चों के लिए ग्रेजुएशन सेरेमनी आयोजित कर उन्हें विद्यारंभ प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया और बच्चों का शाला में सुगम प्रवेश सुनिश्चित किया गया। प्रदेश के इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सराहना मिली है। बाल देखरेख संस्थाओं द्वारा मुख्यमंत्री खेल एवं सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन की प्रक्रिया भी आरंभ की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि सक्षम आंगनबाड़ी उन्नयन के अंतर्गत प्रदेश में एक साथ 12 हजार 670 मिनी केंद्रों को मुख्य आंगनबाड़ी के रूप में उन्नत कर मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बना है। इस प्रकार की पहल में मध्यप्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत जनवरी 2024 से मई 2026 तक प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख से अधिक पात्र बहनों को 47 हजार 775 करोड़ रुपये से अधिक की मासिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत मई 2026 तक 15 लाख 84 हजार बालिकाओं का पंजीयन कर 537 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई।
*मध्यप्रदेश ढाई साल से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के क्रियान्वयन में देश में अव्वल*
बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में दर्ज 15 लाख 51 हजार गर्भवती महिलाओं को 798 करोड़ 68 लाख से अधिक का भुगतान किया गया। इस योजना के क्रियान्वयन में पिछले ढाई साल से मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा सहायिका को बीमा योजना से लाभान्वित किया गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पोषण स्तर में सुधार के लिए किये जा रहे नवाचारों की जानकारी भी दी गई।




