मध्यप्रदेश

वार्ड-24 में डिजिटल क्रांति: धनपुरी पटवारी विजय विश्वकर्मा की टीम ने जमाई ‘किसान चौपाल’, पार्षद स्कंद सोनी के निवास पर रिकॉर्ड पंजीयन

 

शहडोल धनपुरी (असलम बाबा) | खेती-किसानी को डिजिटल शक्ति से जोड़ने और अन्नदाताओं को सरकारी योजनाओं का सीधा हक दिलाने के उद्देश्य से शनिवार, 14 मार्च 2026 को वार्ड क्रमांक 24 में एक अनूठी ‘किसान चौपाल’ का आयोजन किया गया। स्थानीय पार्षद श्री स्कंद सोनी के निवास को सुविधा केंद्र का रूप देते हुए आयोजित इस शिविर में सुबह से ही किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा।

मिशन मोड में प्रशासन: दोपहर से शाम तक जुटा अमला

डिजिटल इंडिया के संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए धनपुरी हल्का पटवारी श्री विजय विश्वकर्मा अपनी तकनीकी टीम के साथ मोर्चा संभाले रहे। दोपहर 12:00 बजे शुरू हुआ पंजीयन का यह सिलसिला बिना रुके शाम 7:00 बजे तक जारी रहा। पटवारी श्री विश्वकर्मा ने स्वयं एक-एक दस्तावेज का बारीकी से निरीक्षण किया और डिजिटल पोर्टल पर किसानों की जानकारी दर्ज की। 7 घंटों की इस मैराथन चौपाल में बड़ी संख्या में किसानों का ‘फार्मर रजिस्ट्रेशन’ संपन्न हुआ।

आधी आबादी और युवाओं का ‘डिजिटल जोश’

इस चौपाल की सबसे सुखद तस्वीर महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही। खेती की बागडोर संभालने वाली महिला किसानों ने पंजीयन की बारीकियों को समझा, वहीं बुजुर्गों और नौजवानों ने भी तकनीक के इस माध्यम को हाथों-हाथ लिया। पटवारी टीम ने सरल भाषा में समझाया कि यह रजिस्ट्रेशन केवल एक कागज नहीं, बल्कि भविष्य में मिलने वाली खाद-बीज सब्सिडी, किसान सम्मान निधि और फसल बीमा का ‘प्रवेश द्वार’ है।

पार्षद की पहल से मिली तहसील के चक्करों से मुक्ति

वार्ड पार्षद श्री स्कंद सोनी ने अपने आवास को किसानों के लिए खोलकर एक मिसाल पेश की। अक्सर तहसील और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने वाले किसानों को उनके घर के पास ही विशेषज्ञ मार्गदर्शन और पंजीयन की सुविधा मिल गई। स्थानीय नागरिकों ने पार्षद की इस पहल और पटवारी विजय विश्वकर्मा की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविरों से आम जनता का सरकारी तंत्र पर भरोसा और मजबूत होता है।

पंजीयन के दूरगामी फायदे: बिचौलियों पर लगाम

शिविर के दौरान पटवारी श्री विश्वकर्मा ने उपस्थित जनसमूह को जागरूक करते हुए बताया कि:

पारदर्शिता: डिजिटल रिकॉर्ड होने से बिचौलियों की भूमिका शून्य हो जाएगी।

सीधा लाभ: फसल की उपज का मूल्य और शासन की प्रोत्साहन राशि सीधे किसान के बैंक खाते में पहुंचेगी।

सुविधा: एक बार पंजीयन होने के बाद भविष्य में बार-बार भू-अभिलेखों के भौतिक सत्यापन की जरूरत नहीं होगी।

एक सफल जन-भागीदारी का उदाहरण

देर शाम तक चले इस शिविर में राजस्व विभाग की टीम, पार्षद कार्यालय के सदस्य और वार्ड के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। इस सफल आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अमला ‘जन-सेवा’ के भाव से एक साथ आते हैं, तो सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचना सुनिश्चित हो जाता है।

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