CVC के रडार पर SECL के ‘भ्रष्ट’ हुक्मरान: खोखली खदान पर मौत की इमारतें, क्या कमिश्नर का डंडा नपेगा?
संपदा और सुरक्षा अधिकारियों की 'काली सांठगांठ' का पर्दाफाश: जेबें भरने के लिए दांव पर लगाई हजारों जानें, अब CVC करेगा सीधा हिसाब!

अमलाई/धनपुरी | विशेष प्रतिनिधि: असलम बाबा धनपुरी में SECL की संपदा (Estate) और सुरक्षा (Security) शाखा के अधिकारियों ने भ्रष्टाचार और लापरवाही की सारी हदें पार कर दी हैं। जिन कंधों पर सरकारी जमीन और जनता की जान बचाने की जिम्मेदारी थी, वही अधिकारी आज भू-माफियाओं और नगर पालिका के साथ मिलकर ‘मौत का सौदा’ कर रहे हैं। मामला अब केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC), नई दिल्ली की मेज पर पहुँच गया है, जहाँ सोहागपुर क्षेत्र के अधिकारियों की गर्दन फंसनी अब तय मानी जा रही है।
बुढार नंबर 1 के ‘खोखले’ सीने पर खड़ी मौत की इमारतें
हैरत की बात यह है कि जहाँ SECL की बुढार नंबर 1 भूमिगत खदान से कोयला निकाला जा चुका है और नीचे की जमीन पूरी तरह खोखली हो चुकी है, ठीक उसी के ऊपर वार्ड क्रमांक 4/7 (छोटी अमलाई) के खसरा नंबर 264, 267, 270 और 272 पर धड़ल्ले से पक्के निर्माण हो रहे हैं। यह पूरा इलाका ‘अत्यंत संवेदनशील सबसाइडेड जोन’ (धंसान प्रभावित क्षेत्र) घोषित है। तकनीकी रूप से यह जमीन कभी भी पाताल में समा सकती है, लेकिन नगर पालिका धनपुरी के रहमोकरम और SECL अधिकारियों की ‘मौन सहमति’ ने इस जानलेवा खतरे को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।
अधिकारियों का ‘घिसा-पिटा फॉर्मूला’: कार्रवाई का ड्रामा और फाइलों में सन्नाटा
जब भी जागरूक जनप्रतिनिधि संपदा अधिकारी से पूछते हैं कि “प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण क्यों नहीं रुक रहा?” तो अधिकारी का रटा-रटाया ‘रिटायर्ड फॉर्मूला’ सामने आता है— “हमने नोटिस जारी कर दिया है, फाइल चल रही है, जल्द कार्रवाई करेंगे।” यह ‘कार्रवाई करेंगे’ वाला जुमला पिछले कई महीनों से चल रहा है, लेकिन धरातल पर ईंट से ईंट जुड़ती जा रही है। सवाल यह है कि क्या SECL का भारी-भरकम सुरक्षा अमला और संपदा विभाग सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए है? नोटिस (प्रकरण 02/2026) जारी होने के बाद निर्माण का जारी रहना यह साबित करता है कि बंद कमरों में ‘सेटिंग’ का खेल अपनी चरम सीमा पर है।
DGMS के नियमों की धज्जियाँ, बड़ी जनहानि की साजिश
यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि एक आपराधिक साजिश है। DGMS (Directorate General of Mines Safety) के सख्त निर्देश हैं कि खदान के ऊपर के प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण मौत को दावत देने जैसा है। स्थानीय निवासी सूर्य प्रताप सिंह गौर ने CVC को भेजे पत्र में स्पष्ट आरोप लगाया है कि स्थानीय संपदा अधिकारी और सुरक्षा अधिकारियों की मिलीभगत से ही नगर पालिका इस अवैध काम को अंजाम दे रही है।
तीखे सवाल जिनका जवाब प्रबंधन के पास नहीं:
सुरक्षा विभाग मौन क्यों? क्या SECL की सुरक्षा टीम इतनी लाचार है कि वह अपनी ही जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण को भौतिक रूप से नहीं रोक सकती?
कैसी जांच? जब जमीन नीचे से खोखली है और इलाका ‘गोप एरिया’ है, तो फिर किस ‘जांच’ का इंतजार किया जा रहा है? क्या किसी बड़े हादसे के बाद फाइलें खुलेंगी?
CVC से मांग: शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इन अधिकारियों की भूमिका की सतर्कता जांच (Vigilance Inquiry) कराई जाए और दोषियों को तत्काल निलंबित किया जाए।
आम जनता का कहना है कि यह विकास नहीं, बल्कि सामूहिक हत्या की तैयारी है। लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि अधिकारी मोटी रकम डकार कर गहरी नींद में सो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि कोई दुर्घटना होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संपदा विभाग और सुरक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी दोषी होंगे। जनता अब इस मामले में आर-पार की लड़ाई और उच्चस्तरीय जांच चाहती है।




