मध्यप्रदेश

अमलाई कोयलांचल में ‘जंगलराज’: HR मैनेजर को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, कानून की आड़ में ब्लैकमेलिंग का खेल; 8 पर गिरी गाज

 

विशेष रिपोर्ट: कोयलांचल (शहडोल) असलम बाबा सोहागपुर कोयला क्षेत्र के अमलाई ओपन कास्ट माइन (OCM) में अनुशासन और सुरक्षा के दावों की सरेआम धज्जियां उड़ा दी गईं। आरकेटीसी (RKTC) कंपनी, जो इस क्षेत्र में ओवर बर्डन (OB) हटाने का महत्वपूर्ण जिम्मा संभाल रही है, वहां के कार्यस्थल पर गुंडागर्दी का ऐसा तांडव मचा कि अधिकारी अपनी जान बचाने के लिए भागते नजर आए। कंपनी के एचआर (HR) मैनेजर नीलेश पाण्डेय पर हुए जानलेवा हमले और उसके बाद दी गई SC/ST एक्ट की फर्जी धमकी ने पूरे कोयलांचल में हड़कंप मचा दिया है।

प्रबंधन ने इस दुस्साहस पर कड़ा प्रहार करते हुए 24 घंटे के भीतर 8 उपद्रवी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो कार्यस्थल को अखाड़ा बनाने की कोशिश कर रहे थे।

विवाद की इनसाइड स्टोरी: हाजिरी रजिस्टर या सोची-समझी साजिश?

घटना 14 फरवरी की सुबह की है, जब अमलाई ओसीएम के सवेरिया कार्यालय में सन्नाटा पसरा था। एचआर मैनेजर नीलेश पाण्डेय रोज की तरह कर्मचारियों की हाजिरी (Attendance) और कार्य प्रबंधन सुनिश्चित करने पहुंचे थे। सूत्रों का कहना है कि कुछ कर्मचारी पहले से ही प्रबंधन के सख्त अनुशासन से नाराज थे। जैसे ही नीलेश ने कार्य आवंटन की बात की, कर्मचारियों के एक गुट ने उन्हें घेर लिया।

पहले तीखी नोकझोंक हुई, फिर गालियां दी गईं और देखते ही देखते पत्थर दिल उपद्रवियों ने मैनेजर के साथ मारपीट शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यालय परिसर के भीतर ही मैनेजर को धक्का दिया गया और उनके साथ अभद्रता की पराकाष्ठा पार कर दी गई।

कानून का ‘हथियार’ बना ‘ढाल’: फर्जी केस की धमकी

इस पूरे मामले का सबसे घिनौना मोड़ तब आया जब मारपीट कर रहे आरोपियों ने नीलेश पाण्डेय को सीधे तौर पर धमकाया। आरोपियों ने चिल्लाते हुए कहा— “मारपीट तो सिर्फ ट्रेलर है, अगर आवाज उठाई तो SC/ST एक्ट के तहत ऐसा मुकदमा ठोकेंगे कि जिंदगी भर जेल की हवा खाओगे।” कानून के इस दुरुपयोग की धमकी ने कार्यस्थल पर मौजूद अन्य स्टाफ को भी सकते में डाल दिया। जानकारों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में यह एक नया और खतरनाक ‘ट्रेंड’ बनता जा रहा है, जहां अधिकारी को डराने के लिए संगीन धाराओं का सहारा लेने की धमकी दी जाती है।

प्रबंधन का कड़ा हंटर: ‘काम करना है तो कायदे में रहना होगा’

घटना के अगले ही दिन, 15 फरवरी को आरकेटीसी कंपनी के उच्च प्रबंधन ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई। प्रारंभिक जांच और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर यह पाया गया कि यह हमला सुनियोजित था। प्रबंधन ने बिना देर किए:

मारपीट में सीधे तौर पर शामिल 8 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया।

स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी किसी भी हरकत पर ‘जीरो टॉलरेंस’ रहेगा।

कार्यस्थल पर सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने और सीसीटीवी निगरानी सख्त करने के निर्देश दिए

पुलिस की भूमिका और श्रमिक संगठनों में हलचल

मामला अब धनपुरी थाना क्षेत्र की चौखट पर है। हालांकि पुलिस अभी औपचारिक शिकायत और जांच के तकनीकी पहलुओं का इंतजार कर रही है, लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी निर्दोष को फंसने नहीं दिया जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, स्थानीय श्रमिक संगठनों में भी इस कार्रवाई को लेकर दो फाड़ दिख रहे हैं— कुछ इसे ‘कड़ा अनुशासन’ कह रहे हैं, तो कुछ इसे ‘बदले की कार्रवाई’।

विशेषज्ञों की राय: संवाद की कमी या गिरता नैतिक स्तर?

औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि कोयला खदानों जैसे संवेदनशील कार्यस्थलों पर प्रबंधन और श्रमिकों के बीच आपसी सम्मान बेहद जरूरी है। अगर मारपीट और फर्जी मुकदमों की धमकियां कार्य संस्कृति का हिस्सा बन गईं, तो औद्योगिक विकास पूरी तरह ठप हो जाएगा। अमलाई ओसीएम की इस घटना ने कोयलांचल में काम करने वाले हर अधिकारी और कर्मचारी के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है— “क्या हम सुरक्षित हैं?”

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