Breaking News

 पाले से फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को सलाह

राजगढ

रवी फसलों हेतु जनवरी माह में शीतलहर का दौर शुरू है। शीतलहर के कारण पौधे की पत्तियां व फुल झुलसतें, बाद में जड़ जाते हैं। शीतलहर का अत्यधिक असर दलहनी तिलहनी, धनिया, मटर व आलू की फसलों पर पड़ता है। रात के समय तापमान 4-5 डिगी या इससे कम होता है तब धरातल के आसपास व फसलों-पौधों की पत्तियों पर बर्फ की पतली परत जम जाती है। इसी परत को पाला कहते है। पौधों की पत्तियों पर पाले का प्रकोप रात 12 से सुबह 4 बजे के बीच अधिकांश होता है। पाले से प्रभावित फसल व पौधों की पत्तियों पर पानी की बूंद जमा हो जाती है, पत्तियों की कोशिका भित्ति फट जाती है जिससे पत्तियां सूखकर झड़ने लगती है।

 

पाले से बचाव के उपाय

 

उप संचालक किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास श्री सचिन जैन द्वारा किसान भाईयों को पाले से फसलो की सुरक्षा एवं सर्तकता हेतु सलाह दी गई है, कि रात्रि में खेत की मेडों पर लगभग 6 से 8 स्थानों पर कचरा तथा खरपतवार आदि जलाकर धुंआ करें। यह प्रयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि धुंआ सारे खेत में छा जाए तथा खेत के आसपास का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक आ जाए। इस प्रकार धुंआ करने से फसल का पाले से बचाव किया जा सकता है। पाले भी संभावना होने पर खेत की हल्की सिंचाई कर देना चाहिए। इससे मिटटी का तापमान बढ़ जाता है तथा नुकसान की मात्रा कम हो जाती है। सिंचाई बहुत ज्यादा नहीं करनी चाहिए तथा इतनी ही करनी चाहिए जिससे खेत गीला हो जाए। रस्सी का उपयोग भी पाले से काफी सुरक्षा प्रदान करता है। इसके लिए दो व्यक्ति सुबह-सुबह (जितनी जल्दी हो सके) एक रस्सी को उसके दोनों सिरों से पकड़ कर खेत के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक फसल हो हिलाते चलना है इससे फसल पर रात का जमा पानी गिर जाता है तथा फसल की पाले से सुरक्षा हो जाती है।

 

इसके अतिरिक्त 8 से 10 कि. ग्रा. सल्फर डस्ट प्रति एकड़ का भुरकाव अथवा वेटेबल या घुलनशील सल्फर 20 ग्राम या ग्लकोस पाउडर 500 ग्राम बनाकर या प्रति थायो यूरिया 500 ग्राम या पोटेशियम सल्फेट (0:0:50) 200 लीटर पानी में घोल छिड़काव करें। साइकोसिल 400 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति रकड़ छिड़काव करें। जिले में कभी-कभी कही कही पर मावठा गिरने की भी सम्भावना रहती है जिससे चना फसल में फुल गिरने की समस्या हो सकती है। जिसके बचाव हेतु की Naphthyl Acetic Acid (NAA) 4-5 ML प्रति पंप छिडकाव करने से उक्त समस्या से बचा जा सकता है साथ ही साथ किसान भाई फसलों में किट व्याधि नियंत्रण का भी विशेष ध्यान रखें। अधिक जानकारी के लिए आपके क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी/ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं तकनीकी सलाह हेतु नजदीकी कृषि विज्ञान केंन्द्र से संपर्क करें।

Related Articles

Back to top button