नन्ही बालिका को चेक सौंपते कलेक्टर, संवेदनशील प्रशासन की तस्वीर
लखन गुर्जर राजगढ़ जिले के खिलचीपुर नगर की एक संकरी गली में घटित हृदयविदारक घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया। आवारा कुत्तों ने एक मासूम बच्चे को घर से खींच लिया। बच्चे की चीखें सुनते ही उसकी बड़ी बहन आरती बिना किसी भय के कुत्तों से भिड़ गई

बहन ने अपने भाई की जान तो बचा ली, लेकिन खुद आवारा कुत्तों का शिकार बन गई। गंभीर रूप से घायल आरती कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रही।
घटना के बाद जिले के अख़बारों और न्यूज चैनलों में खबरें जरूर चलीं, लेकिन पीड़ित परिवार की मदद के लिए कोई ठोस सहायता सामने नहीं आई। पिता सुरेश की आंखों में बेबसी थी, मां मानसिक रूप से टूट चुकी थी और परिवार की आर्थिक स्थिति इलाज के योग्य नहीं थी।
मंगलवार को पीड़ित परिवार राजगढ़ जिला मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई में आवेदन लेकर पहुंचा और अधिकारियों के समक्ष अपनी पीड़ा रखी। स्थानीय लोगों ने भी मानवीयता दिखाते हुए आवेदन तैयार करवाने में सहयोग किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर गिरीश मिश्रा के निर्देशन में और अपर कलेक्टर के सक्रिय सहयोग से जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया। शिक्षा विभाग को बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी सौंपी गई, स्वास्थ्य विभाग को पूरे परिवार के निःशुल्क इलाज के निर्देश दिए गए। साथ ही बालिका के आधार कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेजों की कमी को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए।
इसी क्रम में कलेक्टर गिरीश मिश्रा ने स्वयं नन्ही बालिका को रेड क्रॉस सोसायटी के माध्यम से ₹5,000 की तात्कालिक आर्थिक सहायता का चेक अपने हाथों से प्रदान किया, जबकि पूरी प्रक्रिया में अपर कलेक्टर द्वारा समन्वय एवं त्वरित कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।
जहां एक ओर आवारा कुत्तों का आतंक मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कलेक्टर एवं अपर कलेक्टर के नेतृत्व में जिला प्रशासन की संवेदनशीलता ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में सिस्टम भी परिवार बन सकता है।


