*बोर्ड परीक्षा पर डीजे का हमला*
*“बच्चों की पढ़ाई बनाम बारात का शोर” — रातभर गूंजते डीजे से छात्रों का भविष्य दांव पर, प्रशासन की चुप्पी पर उठे तीखे सवाल*
धनपुरी (शहडोल)मोहम्मद असलम (बाबा) एक तरफ लाखों छात्र अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ शादी-ब्याह के सीजन में रातभर बजने वाले डीजे का शोर उनके सपनों पर हथौड़ा चला रहा है। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होते ही शहर में ध्वनि प्रदूषण को लेकर गंभीर स्थिति बन गई है। छात्रों, अभिभावकों और बुजुर्गों के बीच गहरी चिंता और आक्रोश दिखाई दे रहा है।
*पढ़ाई के बीच ‘कान फोड़ू’ शोर का आतंक*
रात 10 बजे के बाद भी शहर के मैरिज गार्डन और बारात घरों में हाई-डेसीबल डीजे धड़ल्ले से बज रहे हैं। परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्र देर रात तक पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन तेज आवाज के कारण उनकी एकाग्रता टूट रही है।
*एक परीक्षार्थी ने दर्द बयान करते हुए कहा*
“हम पूरी रात पढ़ना चाहते हैं, लेकिन डीजे की आवाज से सिर फटने लगता है। खिड़की-दरवाजे बंद करने के बाद भी पढ़ाई संभव नहीं होती।”
*नियम हैं, लेकिन अमल गायब*
Supreme Court of India के स्पष्ट निर्देश हैं कि रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर और डीजे का उपयोग प्रतिबंधित है। इसके बावजूद शहर में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
प्रशासन ने कागजों में साइलेंस जोन घोषित जरूर कर रखे हैं, लेकिन धरातल पर इनका पालन होता कहीं नजर नहीं आ रहा।
*मुख्यमंत्री के आदेश पर सवाल*
प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने पदभार संभालते ही ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती के निर्देश जारी किए थे। उस समय पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए धार्मिक स्थलों पर लगे ध्वनि विस्तारक यंत्र हटवाए या उनकी आवाज सीमित करवाई थी।
मुख्यमंत्री के आदेश को सभी धर्मों के अनुयायियों ने सहजता से स्वीकार किया। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि जब धार्मिक स्थलों पर नियम लागू हो सकते हैं तो शादी समारोहों में इन्हें नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है?
*बच्चों के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता*
स्थानीय अभिभावकों और बुजुर्गों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है कि अगर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि —
👉 मैरिज हॉल में पूरी रात तेज आवाज में डीजे बजते हैं
👉 बुजुर्ग और बीमार लोगों को गंभीर परेशानी हो रही है
👉 छोटे बच्चों और विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है
❓ प्रशासन से बड़े सवाल
👉 बोर्ड परीक्षाओं के दौरान ध्वनि प्रतिबंध सिर्फ कागजों तक क्यों सीमित है?
👉 पुलिस पेट्रोलिंग टीम डीजे संचालकों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?
👉 अनुमति से ज्यादा आवाज पर सख्त कार्रवाई कब होगी?
👉 शिकायत के बाद भी मौके पर जाकर डीजे बंद या जब्त क्यों नहीं किए जा रहे?
👉 क्या रसूखदारों के जश्न के आगे बच्चों का भविष्य छोटा पड़ गया है?
*हर मिनट की कीमत, हर रात की परीक्षा*
विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षा के दौरान मानसिक शांति और एकाग्रता बेहद जरूरी होती है। लगातार शोर से विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ता है और इसका सीधा असर उनके परिणाम पर पड़ सकता है।
*चेतावनी — अगर अब भी नहीं जागा प्रशासन*…
अगर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने ‘शोर के सौदागरों’ पर समय रहते नकेल नहीं कसी, तो इसका खामियाजा हजारों छात्रों को भुगतना पड़ सकता है।
*अब जनता की निगाह प्रशासन पर*
*शहर में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है*
क्या प्रशासन छात्रों की सिसकियां सुनेगा या डीजे का शोर बच्चों के सपनों को यूं ही कुचलता रहेगा?




