छात्राओं से आत्मीय संवाद कर कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने परखी छात्रावास की व्यवस्थाएं, कहा– बेटियों की सुविधाओं और सुरक्षा में न रहे कोई कमी
राजगढ़ 
कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने पुलिस लाइन के समीप स्थित जूनियर बालिका छात्रावास राजगढ़ क्रमांक -2, सीनियर बालिका छात्रावास राजगढ़ क्रमांक -2 एवं वीरांगना रानी दुर्गावती सीनियर बालिका छात्रावास राजगढ़ का निरीक्षण कर छात्राओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान जिला संयोजक श्री संजय साहू एवं छात्रावास अधीक्षिका श्रीमती अनुराधा दांगी एवं श्रीमती ऋतु सक्सेना उपस्थित रही। कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने छात्रावास में संचालित ई-लाइब्रेरी का अवलोकन किया और छात्राओं की पढ़ाई के लिए विभाग द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने छात्राओं से आत्मीय संवाद कर उनकी पढ़ाई, विषयों की समझ और भविष्य के लक्ष्यों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि रटने के बजाय विषयों को अच्छी तरह समझकर पढ़ें, क्योंकि विषय की गहरी समझ ही सफलता का आधार बनती है।
*बिस्तर, भोजन और पेयजल व्यवस्था का किया निरीक्षण*
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने छात्राओं के कक्ष, बिस्तर, कंबल, चादर, फर्नीचर, शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने मेस में भोजन की गुणवत्ता, रसोईघर की स्वच्छता तथा परिसर में विकसित किचन गार्डन का भी निरीक्षण किया। छात्राओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए दोनों आरओ वाटर प्यूरीफायर की कार्यशीलता भी जांची। साथ ही शिकायत पेटियों का अवलोकन कर शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की जानकारी ली।
*मच्छरदानी और पर्दों की व्यवस्था के दिए निर्देश*
कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने छात्राओं से पूछा कि उन्हें उपलब्ध सुविधाओं के अतिरिक्त किसी अन्य सुविधा की आवश्यकता तो नहीं है। छात्राओं की जरूरतों और सुझावों को सुनते हुए उन्होंने जिला संयोजक श्री साहू को छात्रावास में मच्छरदानियों एवं पर्दों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही बस्ती विकास योजना के अंतर्गत छात्रावास तक पहुंच मार्ग का निर्माण कराने के निर्देश भी दिए, ताकि छात्राओं को आवागमन में सुविधा हो। कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने अधीक्षिका श्रीमती दांगी को निर्देशित किया कि छात्रावास में रह रही बेटियों की देखभाल में विशेष संवेदनशीलता बरतें। उन्होंने कहा कि छात्राएं अपने घर-परिवार से दूर रहकर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं और अपने भविष्य का निर्माण कर रही हैं। ऐसे में उन्हें छात्रावास में घर जैसा स्नेहपूर्ण वातावरण, सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।



