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युवाओं के साथ जन सुरक्षा का संवाद, 60 हजार से अधिक कॉलेज विद्यार्थी जुड़े पुलिस एवं उच्च शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल से कानून, साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और नागरिक कर्तव्यों पर कार्यशालाएं

 

भोपाल :

युवाओं को संविधान और कानून की जानकारी देने, साइबर अपराधों के प्रति सतर्क बनाने तथा नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति संवेदनशील करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस एवं उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद आयोजित किया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में चल रही इन गतिविधियों से अब तक 60 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं जुड़ चुके हैं। मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग शाखा, द्वारा उच्च शिक्षा विभाग के साथ समन्वय से संचालित इस पहल का उद्देश्य युवाओं को केवल कानून और सुरक्षा संबंधी जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक, सजग, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संविधान, कानूनी अधिकार, नवीन आपराधिक न्याय विधान, साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव एवं नागरिक कर्तव्यों जैसे विषयों से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय एकता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित हो रहे इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को उनके दैनिक जीवन से जुड़े सुरक्षा एवं सामाजिक सरोकारों की जानकारी दी जा रही है।

 

MoU के माध्यम से पुलिस और उच्च शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल

 

मध्यप्रदेश पुलिस एवं उच्च शिक्षा विभाग के मध्य हुए समझौता ज्ञापन के आधार पर इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। इसका उद्देश्य महाविद्यालयों और पुलिस के बीच संवाद को संस्थागत स्वरूप देना तथा विद्यार्थियों को जन सुरक्षा से जुड़े विषयों की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया जा रहा है कि सुरक्षित समाज के निर्माण में कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्थाओं के साथ नागरिकों की जागरूकता और सहभागिता भी महत्वपूर्ण है।

 

66 महाविद्यालयों के 136 प्राध्यापक बने प्रशिक्षक

 

कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए सामुदायिक पुलिसिंग शाखा, पुलिस मुख्यालय द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को राज्य स्तरीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (Training of Trainers—ToT) आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के 66 शासकीय महाविद्यालयों के 136 प्राध्यापकों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण में प्राध्यापकों को संविधान एवं मौलिक अधिकार, विधिक जागरूकता, नवीन आपराधिक न्याय विधान, साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव एवं नागरिक कर्तव्यों से संबंधित विषयों पर जानकारी दी गई। इन प्रशिक्षित प्राध्यापकों के माध्यम से महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए निर्धारित विषयों पर संवाद एवं कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

 

14-15 अक्टूबर को तय हुई प्रदेशव्यापी कार्ययोजना

 

ToT के बाद 14 एवं 15 अक्टूबर को उच्च शिक्षा विभाग के प्रशिक्षित प्राध्यापकों और मध्यप्रदेश पुलिस के राज्य स्तरीय नोडल अधिकारियों के साथ ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें कार्यक्रम के संचालन, विषयवस्तु और महाविद्यालय स्तर पर गतिविधियों के आयोजन को लेकर समन्वय किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय प्रारूप निर्धारित किया गया, जिसमें पहले दिन महाविद्यालय में विषयगत कार्यशाला और दूसरे दिन पुलिस थाना भ्रमण का प्रावधान रखा गया।

 

कार्यशाला में कानून से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक विषय

 

महाविद्यालयों में आयोजित कार्यशालाओं में विद्यार्थियों को संविधान, मौलिक एवं कानूनी अधिकारों तथा नवीन आपराधिक न्याय विधान की मूलभूत जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही साइबर अपराधों से बचाव, डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग, मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक संतुलन जैसे विषयों पर भी चर्चा की जा रही है। विद्यार्थियों को ऑनलाइन गतिविधियों में सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि के प्रति सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है। नागरिक कर्तव्यों, कानून के सम्मान और सामाजिक सद्भाव से जुड़े विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन भी आवश्यक है।

 

थाना भ्रमण से पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से समझ रहे विद्यार्थी

 

दूसरे दिन विद्यार्थियों को संबंधित पुलिस थानों का भ्रमण कराया जा रहा है। यहां उन्हें पुलिस की दैनिक कार्यप्रणाली, कानून-व्यवस्था संबंधी दायित्व, नागरिक सहायता, शिकायत व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कार्यों की जानकारी मिल रही है। थाना भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुलिस की भूमिका का प्रत्यक्ष अनुभव देना और उनके मन में पुलिस व्यवस्था को लेकर मौजूद जिज्ञासाओं का समाधान करना है। इससे विद्यार्थियों और पुलिस के बीच प्रत्यक्ष संवाद का अवसर भी मिल रहा है।

 

60 हजार से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता

 

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित गतिविधियों में अब तक 60 हजार से अधिक महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं की सहभागिता हो चुकी है। विद्यार्थियों की भागीदारी केवल कार्यशालाओं तक सीमित नहीं है। थाना भ्रमण के दौरान भी वे पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों से विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त कर रहे हैं तथा जन सुरक्षा से जुड़े अपने प्रश्नों पर संवाद कर रहे हैं। इस व्यापक सहभागिता से महाविद्यालयों में सुरक्षा, कानून और नागरिक जिम्मेदारियों से जुड़े विषयों पर संवाद का वातावरण तैयार हुआ है।

 

सामुदायिक पुलिसिंग को मिला नया आयाम

 

जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद सामुदायिक पुलिसिंग की उस कार्यपद्धति को आगे बढ़ाता है, जिसमें पुलिस और समाज के बीच नियमित संपर्क एवं विश्वास को महत्व दिया जाता है। इस पहल में पुलिस की व्यावहारिक जानकारी को महाविद्यालयीन शिक्षा के साथ जोड़ा गया है। प्राध्यापक विद्यार्थियों तक विषयवस्तु पहुंचा रहे हैं, जबकि थाना भ्रमण उन्हें पुलिस व्यवस्था का व्यावहारिक पक्ष समझने का अवसर दे रहा है। इससे युवाओं को कानून एवं सुरक्षा के विषयों को केवल सैद्धांतिक रूप से जानने के बजाय उन्हें अपने दैनिक जीवन और सामाजिक भूमिका से जोड़कर देखने का अवसर मिल रहा है।

 

जागरूक युवा, सुरक्षित समाज की दिशा में कदम

 

इस पहल का व्यापक उद्देश्य युवाओं में ऐसी समझ विकसित करना है, जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के साथ कानून का सम्मान करें, डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करें, सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में सहयोग दें और आवश्यकता पड़ने पर स्वयं तथा दूसरों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी निभाएं। मध्यप्रदेश पुलिस एवं उच्च शिक्षा विभाग का यह संयुक्त प्रयास महाविद्यालयों को जन जागरूकता के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी उपयोगी साबित हो रहा है। भविष्य में कार्यक्रमों की निरंतरता, विद्यार्थियों की प्रतिपुष्टि और प्रभाव के आकलन के आधार पर इसकी गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जा सकता है। युवाओं की ऊर्जा और जागरूकता को जन सुरक्षा से जोड़ते हुए यह पहल पुलिस, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के बीच सहयोग की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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