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प्रेतशिला: गया की वह रहस्यमयी पहाड़ी, जहां अकाल मृत्यु वाले पितरों के लिए होता है पिंडदान

 

गया। बिहार के गया शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित प्रेतशिला पहाड़ी आस्था, पौराणिक मान्यताओं और रहस्य का अनूठा संगम मानी जाती है। इसे आम बोलचाल में ‘भूतों का पहाड़’ भी कहा जाता है। करीब 676 सीढ़ियां चढ़कर श्रद्धालु पहाड़ी के शिखर तक पहुंचते हैं, जहां प्रेतशिला वेदी पर पिंडदान और श्राद्धकर्म का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

अकाल मृत्यु वाले पितरों के लिए विशेष महत्व

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुर्घटना, बीमारी अथवा अन्य कारणों से अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए गया में पिंडदान किया जाता है। पितृपक्ष के दौरान प्रेतशिला पर होने वाला पिंडदान विशेष फलदायी माना जाता है।

मान्यता है कि यहां विधि-विधान से पिंडदान करने से अकाल मृत्यु को प्राप्त परिजनों की आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें प्रेत योनि से मुक्ति प्राप्त होती है।

सत्तू उड़ाने की अनोखी परंपरा

प्रेतशिला पर होने वाले कर्मकांड में सत्तू और तिल से जुड़ी एक अनोखी परंपरा भी बताई जाती है। पिंडदानी तिल मिश्रित सत्तू को धर्मशिला पर अर्पित करते हैं और धार्मिक मंत्र का उच्चारण करते हुए चट्टान की परिक्रमा करते हैं।

स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार चट्टान में मौजूद एक सूक्ष्म दरार को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है। विश्वास है कि सत्तू का कण उस दरार में पहुंचने पर अकाल मृत्यु वाले पितर को मुक्ति का मार्ग मिलता है।

इसी परंपरा के चलते यहां पिंडदान के बाद सत्तू ग्रहण करने की भी मान्यता बताई जाती है।

दो वेदियों और ब्रह्म कुंड का महत्व

प्रेतशिला से जुड़े धार्मिक स्थलों में ब्रह्म कुंड और प्रेतशिला वेदी का विशेष उल्लेख मिलता है। स्थानीय धार्मिक जानकार धर्मेंद्र गिरी के अनुसार, इस स्थान पर पिंडदान का विशेष महत्व है और यहां स्थित तालाब का उल्लेख वायु पुराण में भी बताया जाता है।

पहाड़ी के नीचे स्थित ब्रह्म कुंड को लेकर भी प्राचीन धार्मिक मान्यता है। कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने यहां यज्ञ किया था और प्राचीन काल में यह स्थान घी के सरोवर के रूप में वर्णित किया जाता था।

यमराज के मंदिर में भी पहुंचते हैं श्रद्धालु

प्रेतशिला पहाड़ी पर भगवान यमराज का मंदिर भी बताया जाता है। अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए परिजनों की स्मृति में श्रद्धालु यहां उनके नाम से पूजा और पिंडदान करते हैं। कई परिवार अपने दिवंगत परिजनों की तस्वीरें भी साथ लेकर पहुंचते हैं।

पुराणों में भी मिलता है उल्लेख

प्रेतशिला का धार्मिक इतिहास अत्यंत प्राचीन माना जाता है। इससे जुड़े संदर्भ वायु पुराण और विष्णु पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में बताए जाते हैं। यही कारण है कि गया आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रेतशिला केवल एक पहाड़ी नहीं, बल्कि पितरों की शांति और मोक्ष से जुड़ा महत्वपूर्ण तीर्थस्थल मानी जाती है।

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