आपदा प्रबंधन से स्मार्ट सिटी तक, लिडार तकनीक का प्रयोग

रांची : रांची स्थित बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा में “हाइपरस्पेक्ट्रल एवं लिडार डेटा विश्लेषण” विषय पर आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन लिडार तकनीक पर एक विशेषज्ञ सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला रिमोट सेंसिंग एवं जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग द्वारा आयोजित की गई। इस सत्र का संचालन भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम के पृथ्वी एवं अंतरिक्ष विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रमिया ए.एम. ने किया। उन्होंने लिडार प्रणालियों के तकनीकी आधार एवं उनके व्यावहारिक उपयोगों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। सत्र में लिडार की कार्यप्रणाली, मल्टी-रिटर्न सिस्टम तथा पॉइंट क्लाउड प्रोसेसिंग जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया, साथ ही यह बताया गया कि लिडार किस प्रकार सटीक स्थलाकृतिक मानचित्रण एवं स्थानिक डेटा निर्माण में सहायक है। व्याख्यान के दौरान लिडार तकनीक के विभिन्न अनुप्रयोगों- जैसे बाढ़ मॉडलिंग, डिजिटल ट्विन विकास, शहरी एवं परिसर मॉडलिंग, विद्युत लाइन मानचित्रण तथा वन विश्लेषण (जिसमें व्यक्तिगत वृक्षों की पहचान एवं 3D मॉडलिंग शामिल है) पर विस्तार से चर्चा की गई। सत्र में ओपन लिडार डेटा सेट, ओपन-सोर्स टूल्स तथा राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीतियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया, जो इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं अनुप्रयोगों के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। चर्चाओं में लिडार तकनीक को वर्तमान राष्ट्रीय आवश्यकताओं, जैसे आपदा प्रबंधन, अवसंरचना योजना, स्मार्ट सिटी विकास एवं पर्यावरण निगरानी के संदर्भ में भी प्रस्तुत किया गया, जहाँ उच्च-सटीकता वाले स्थानिक डेटा की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है और यह नीति निर्माण एवं निर्णय प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।




