छत्तीसगढ़

सफलता की कहानी“छोटी दुकान, बड़ा हौसला: योजनाओं के सहारे ममता बनीं आत्मनिर्भर”


एमसीबी/12 मार्च 2026/ 
आज जब शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं, तब कई महिलाएं इन अवसरों को अपनाकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद यदि हौसला मजबूत हो और सही दिशा मिल जाए, तो सफलता की नई राह बन जाती है। एमसीबी जिले की ममता इसकी एक प्रेरक मिसाल हैं, जिन्होंने सरकारी योजनाओं के सहारे अपने छोटे व्यवसाय को खड़ा कर आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ाया है।
ममता ने बिहान योजना के अंतर्गत स्व-सहायता समूह से जुड़कर पहली बार 5 हजार रुपये का ऋण लिया। इस राशि से उन्होंने अपने घर पर ही एक छोटी किराना दुकान शुरू की। शुरुआत साधारण थी, लेकिन ममता की मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे इस छोटे प्रयास को आगे बढ़ा दिया। समय के साथ जब उनका आत्मविश्वास बढ़ा तो उन्होंने व्यवसाय को विस्तार देने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने स्व-सहायता समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लिया और दुकान के लिए आइसक्रीम रखने का फ्रीजर खरीदा। इससे दुकान में ग्राहकों की संख्या बढ़ी और उनकी आय के नए रास्ते खुल गए।
इसके साथ ही ममता को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता भी प्राप्त हो रही है। इस सहायता राशि का उपयोग वे अपने व्यवसाय को मजबूत करने और परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में कर रही हैं। आज ममता अपने इस छोटे व्यवसाय के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 7 से 8 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई और घर की आवश्यकताओं को भी बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं।
ममता बताती हैं कि सरकारी योजनाओं से उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास और अवसर मिला है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि इन योजनाओं से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की नई राह मिल रही है। ममता की यह कहानी बताती है कि छोटी शुरुआत भी बड़े बदलाव की नींव बन सकती है। आज वे अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं और यह संदेश दे रही हैं कि मेहनत और अवसर मिलकर जीवन की दिशा बदल सकते हैं।

समाचार क्रमांक/165/लोकेश/फोटो/05 से 07

सफलता की कहानी

छोटे कदम से बड़ा बदलाव: महतारी वंदन योजना से आत्मनिर्भर बनीं राजेश्वरी परस्ते

एमसीबी/12 मार्च 2026/ जिले के भरतपुर विकासखंड के छोटे से गांव की रहने वाली राजेश्वरी परस्ते ने यह साबित कर दिया है कि यदि हौसला और अवसर साथ हों, तो छोटी शुरुआत भी आत्मनिर्भरता की मजबूत राह बना सकती है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उनकी यह कहानी महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आती है।

जिले के ग्राम पोट्टाझोरकी की निवासी राजेश्वरी परस्ते सीमित संसाधनों के बीच अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए कुछ नया करना चाहती थीं। इसी दौरान उन्हें राज्य सरकार की महतारी वंदन योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ।

राजेश्वरी परस्ते को इस योजना के तहत प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। उन्होंने इस राशि को नियमित रूप से बचाया और अपनी ओर से कुछ पैसे जोड़कर अपने घर पर ही एक छोटी किराना दुकान शुरू की। शुरुआत में दुकान में सीमित सामान था, लेकिन उनकी मेहनत और लगन से धीरे-धीरे दुकान चलने लगी। आज उनकी किराना दुकान गांव के लोगों के लिए दैनिक जरूरतों का एक सुविधाजनक केंद्र बन गई है। दुकान से होने वाली आय से वे अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं और घर की जरूरतों को पूरा करने में भी सहयोग दे रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है।

राजेश्वरी परस्ते का कहना है कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें कुछ नया करने की प्रेरणा और आत्मविश्वास दिया है। अब वे अपने काम से संतुष्ट हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने में गर्व महसूस करती हैं। उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। राजेश्वरी की यह कहानी बताती है कि जब महिलाओं को अवसर, सहयोग और आत्मविश्वास मिलता है, तो वे अपने प्रयासों से न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि समाज में भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं।

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