आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में होगी गैर संचारी रोगों की प्रभावी स्क्रीनिंग

जयपुर, 7 मार्च। प्रदेश के नागरिकों को उच्च कोटि की स्वास्थ्य सेवाएं सुगमता के साथ उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा रेफरल सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही, डिजिटाइजेशन एवं ई—सेवाओं को प्राथमिकता के साथ बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्य सचिव श्री वी श्रीनिवास ने शनिवार को जयपुर जिले के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण करते हुए इस संबंध में आवश्यक दिशा—निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने शनिवार प्रात: जयपुर के मालवीय नगर स्थित शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर, बीलवा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, चाकसू के उप जिला अस्पताल एवं आजमनगर उप स्वास्थ्य केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण किया। संस्थानों में पंजीकरण, स्क्रीनिंग, जांच, उपचार, साफ—सफाई, स्टाफ एवं बैड सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता तथा उनके समुचित उपयोग को लेकर जानकारी ली। उन्होंने विगत समय में चिकित्सा संस्थानों के सघन निरीक्षण और नवाचरों से आए सुधारों को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नए भवनों के निर्माण, आधुनिक मशीनों की उपलब्धता तथा नवाचारों को प्रोत्साहन देने से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षानुरूप सुधार हो रहा है, इन सुधारों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रो—एक्टिव एप्रोच और स्मार्ट तरीकों के साथ काम किया जाए।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में हो प्रभावी एनसीडी स्क्रीनिंग ,मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं भी हों और मजबूत-
मुख्य सचिव ने निरीक्षण के दौरान निर्देश दिए कि प्रदेश में स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में 12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्तापूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर ही गैर संचारी रोगों की प्रभावी स्क्रीनिंग कर लोगों को लाइफ स्टाइल डिजीज से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को भी और मजबूत किया जाए, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में और कमी लाकर स्वास्थ्य मानकों को बेहतर किया जा सके।
रोगी भार अधिक तो क्यू मैनेजमेंट सिस्टम अपनाएं-
मुख्य सचिव ने चाकसू में राजकीय उप जिला अस्पताल का निरीक्षण करने के दौरान यहां रोगीभार अधिक होने के दृष्टिगत क्यू मैनेजमेंट सिस्टम विकसित करने, रेफरल सिस्टम मजबूत करने, डिजिटिलाइजेशन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल के नए भवन के कार्य को गति देते हुए जल्द पूर्ण करने एवं तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल में रोगियों एवं उनके परिजनों से संवाद किया और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर फीडबैक लिया। रोगियों से प्राप्त सकारात्मक फीडबैक पर उन्होंने खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रोगियों की संतुष्टि ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का पैमाना है। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग की सराहना की।
रेफरल का पूरा रिकॉर्ड करें संधारित-
इसी प्रकार बीलवा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर साफ—सफाई व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यहां एनसीडी रोगों की स्क्रीनिंग बढ़ाते हुए प्रभावी रेफरल सिस्टम विकसित किया जाए। रेफरल का पूरा रिकॉर्ड सुनियोजित तरीके से संधारित किया जाए। यहां स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन को और मजबूत कर रोगी भार बढ़ाया जाए, ताकि उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित हो। उन्होंने पेलिएटिव केयर, जीरियाट्रिक केयर और प्रसूति सेवाओं को भी सुदृढ़ करने पर बल दिया।
सीएचओ नजदीकी उच्च चिकित्सा संस्थान के साथ रखें बेहतर समन्वय-
आजमनगर उप स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि रोगियों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर उपचार के लिए सीएचओ नजदीकी उच्च चिकित्सा केंद्र के साथ बेहतर समन्वय रखें। प्राथमिक स्क्रीनिंग को मजबूत करें और इसके बाद रोगी को रेफर करने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने शत—प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किए जाने पर भी जोर दिया, ताकि स्वास्थ्य मानकों को और बेहतर किया जा सके। मालवीय नगर आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मुख्य सचिव ने दवा वितरण व्यवस्था का जायजा लिया और साफ—सफाई को और बेहतर करने के निर्देश दिए।
मिशन मोड में भर्तियों से पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध, 1700 से अधिक नए भवन बनाए-
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने निरीक्षण के दौरान बताया कि विगत समय में प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों का सघन निरीक्षण सुनिश्चित किया गया है। इससे अस्पतालों के मानकों में सुधार हुआ है। मिशन मोड में भर्तियां होने से अधिकतर संस्थानों में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध हो रहा है। ट्रोमा सेंटर एवं एफआरयू में जरूरी सुविधाओं की सुनिश्चितता कर इन्हें क्रियाशील किया जा रहा है। साथ ही, पुराने भवनों की चरणबद्ध रूप से मरम्मत करवाई जा रही है एवं 1700 से अधिक चिकित्सा संस्थानों के नए भवन बनाए गए हैं। मिशन लीवर स्माइल, मिशन मधुहारी, पिंक पखवाड़ा, स्वस्थ नारी चेतना अभियान, निरामय राजस्थान जैसे नवाचारों के माध्यम से एनसीडी स्क्रीनिंग को मजबूत किया गया है, ताकि प्राथमिक स्तर पर ही जांच एवं उपचार कर रोगी को जटिलता से बचाया जा सके।
इस दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।




