अमलाई OCM में गूंजेगा मशीनों का महाघोष: बाधाएं ढेर, 48 घंटे में शुरू होगा ‘कोयले का खेल’
सोहागपुर एरिया की सबसे बड़ी जीत: आरकेटीसी कंपनी और प्रबंधन के फौलादी तालमेल ने तकनीकी चुनौतियों को किया धराशायी, 15 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य साधने की तैयारी हुई प्रचंड।

धनपुरी | विशेष संवाददाता असलम बाबा एसईसीएल सोहागपुर एरिया की सबसे महत्वाकांक्षी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना ‘अमलाई ओपन कास्ट माइंस’ (OCM) के माथे से आखिरकार अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं। लंबे समय से जिस घड़ी का इंतजार कोयलांचल की जनता और प्रबंधन को था, वह अब दस्तक दे चुकी है। तकनीकी खामियों और व्यवस्थागत अड़चनों की दीवार को अपनी अदम्य इच्छाशक्ति से ढहाते हुए, सोहागपुर प्रबंधन और आरकेटीसी कंपनी के बीच हुए बेमिसाल तालमेल ने विरोधियों और बाधाओं को शांत कर दिया है। अगले 2 से 4 दिनों के भीतर खदान की गहराइयों से काला सोना (कोयला) निकलने का सिलसिला विधिवत शुरू हो जाएगा। यह केवल उत्पादन की शुरुआत नहीं, बल्कि सोहागपुर एरिया के वर्चस्व की पुनर्स्थापना है।
तालमेल से पलटी बाजी, अब रिकॉर्ड तोड़ने की बारी
अमलाई ओसीएम को इस चालू वित्तीय वर्ष के लिए 15 लाख टन के भारी-भरकम कोयला उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। गौरतलब है कि शुरुआत में कुछ अप्रत्याशित तकनीकी पेच और परिचालन संबंधी जटिलताओं ने राह रोकी थी, जिससे उत्पादन की रफ्तार पर ब्रेक लगा था। लेकिन, कंपनी के जीएम रेड्डी के आक्रामक और दूरदर्शी नेतृत्व ने पूरी तस्वीर बदल दी है। आरकेटीसी कंपनी और सोहागपुर महाप्रबंधक कार्यालय के बीच हुए सटीक समन्वय ने उन तमाम कांटों को बुहार दिया है जो प्रगति की राह में रोड़ा बने थे। सूत्रों की मानें तो प्रबंधन ने स्टाफ, अत्याधुनिक मशीनरी और कॉलोनी प्रबंधन की आंतरिक व्यवस्थाओं को इस कदर अभेद्य और चुस्त-दुरुस्त किया है कि अब विफलता का कोई स्थान नहीं बचा है।
‘वॉर फुटिंग’ पर तैयारियां, सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं
वर्तमान में खदान परिसर का दृश्य किसी युद्ध के मैदान जैसा है, जहाँ जीत सुनिश्चित करने के लिए हर सिपाही मुस्तैद है। मशीनों की ऑयलिंग, ओवरहॉलिंग और हाइड्रोलिक्स की जांच से लेकर श्रमिकों की अंतिम ब्रीफिंग तक, हर मोर्चा तैयार है। जीएम रेड्डी की टीम ने स्पष्ट और कड़ा संदेश दे दिया है कि ‘सुरक्षा सर्वोपरि’ (Safety First) के सिद्धांत पर चलते हुए उत्पादन की गति को उसके चरम (Peak) पर ले जाया जाएगा। खदान में आ रही बाधाओं के समूल नाश होते ही अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। अब लक्ष्य केवल उत्पादन की औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि शेष समय में करीब 10 लाख टन से अधिक का उत्पादन कर सोहागपुर एरिया को एसईसीएल के मानचित्र पर सिरमौर बनाना है।
क्यों मील का पत्थर साबित होगा यह ‘ग्रैंड कमबैक’?
अभेद्य समन्वय: निजी कंपनी आरकेटीसी और सोहागपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक के बीच हुआ यह ऐतिहासिक तालमेल भविष्य की अन्य परियोजनाओं के लिए एक आदर्श ‘ब्लूप्रिंट’ बन गया है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को संजीवनी: खदान के पूर्ण संचालन से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय श्रमिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की सक्रियता से क्षेत्र के बाजारों में भी रौनक लौटेगी।
दृढ़ संकल्प की विजय: तमाम नकारात्मक चर्चाओं और परिचालन संबंधी चुनौतियों को दरकिनार कर प्रबंधन ने यह साबित कर दिया है कि यदि नेतृत्व मजबूत हो, तो कोई भी बाधा स्थायी नहीं हो सकती।
मशीनों की गर्जना देगी विकास की गवाही
मैदानी स्तर पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के साथ ही श्रमिकों और तकनीकी अमले को पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में डाल दिया गया है। प्रबंधन का मानना है कि कोयला उत्पादन में होने वाली यह बढ़ोतरी न केवल एरिया के वार्षिक टारगेट को पूरा करने में संजीवनी का काम करेगी, बल्कि कंपनी की वित्तीय स्थिति को भी नई मजबूती प्रदान करेगी। अमलाई क्षेत्र में बहुत जल्द भारी-भरकम डंपरों और मशीनों की गूंज यह ऐलान करेगी कि सोहागपुर अब रुकने वाला नहीं है।
“हमने हर तकनीकी बाधा और व्यवस्थागत चुनौती को अपनी सटीक रणनीति से परास्त किया है। अब मशीनें नहीं, बल्कि हमारा साझा संकल्प गूंजेगा। अगले 48 से 96 घंटों के भीतर उत्पादन की शुरुआत कर हम सोहागपुर एरिया को नई औद्योगिक ऊंचाइयों पर स्थापित करने जा रहे हैं।”
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