मध्यप्रदेश

*मजदूरों पर भारी तिवारी आरकेटीसी को राज कर रहा कंट्रोल* 

*कोयला मजदूरों का फूटा गुस्सा: आरकेटीसी कंपनी पर शोषण और तानाशाही के गंभीर आरोप*

 

 

 

*सोहागपुर क्षेत्र में ‘जंगलराज’ का माहौल, मजदूरों के घरों के चूल्हे तक ठंडे*

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धनपुरी (शहडोल )सोहागपुर क्षेत्र की अमलाई ओसीएम खदान में हालात दिन-ब-दिन विस्फोटक होते जा रहे हैं। कोयला मजदूर सभा (एच.एम.एस.) द्वारा प्रबंधन को सौंपे गए पत्र ने आरकेटीसी कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ठेका श्रमिकों के साथ मनमानी, दबाव और पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है, जिससे मजदूरों और उनके परिवारों पर गहरा आर्थिक संकट टूट पड़ा है।

संघ का आरोप है कि स्थानीय श्रमिकों को कथित रूप से झूठे आरोपों में फंसाकर सेवा से अलग किया गया। मजदूर प्रतिनिधियों पर दबाव बनाने और उन्हें हाशिये पर धकेलने की भी बात कही गई है। बार-बार अवगत कराने के बावजूद प्रबंधन द्वारा ठोस पहल न किए जाने से आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

मजदूरों का कहना है कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। खदान परिसर में नियम-कानून से अधिक भय और दबाव का वातावरण हावी होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है—जिसमें चक्का जाम, उत्पादन बंद और डिस्पैच रोकने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। संगठन ने स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि कंपनी के भीतर कथित दबाव समूहों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। ‘तिवारी बंधुओं’ के नाम को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं हैं कि उनका बढ़ता प्रभाव प्रबंधन के निर्णयों को प्रभावित कर रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन यदि किसी भी प्रकार का बाहरी या आंतरिक दबाव कंपनी की नीतियों पर हावी होता है, तो इसका सीधा असर औद्योगिक माहौल और कंपनी की साख पर पड़ सकता है।

पूर्व में एक दुर्घटना में युवक की मृत्यु का मामला भी स्थानीय लोगों के बीच चर्चा में है। मजदूर संगठनों का दावा है कि उस प्रकरण में पारदर्शिता और न्याय को लेकर सवाल उठे थे तथा मृतक परिवार को उचित मुआवजा और नियमानुसार सहायता दिए जाने की मांग की गई थी।

अब बड़ा प्रश्न यह है कि क्या आरकेटीसी प्रबंधन संवाद और पारदर्शिता का रास्ता अपनाएगा या फिर बढ़ते विवाद कंपनी को ही संकट में डाल देंगे? तिवारी बंधुओं का बढ़ता दबाव, यदि सच साबित होता है, तो कहीं ऐसा न हो कि यह अंदरूनी खींचतान कंपनी की साख और संचालन को ही ले डूबे।

सोहागपुर क्षेत्र में श्रमिकों की निगाहें अब प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में प्रबंधन का रुख तय करेगा कि हालात संभलेंगे या औद्योगिक टकराव और गहराएगा।

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