आदेश पर अमल की सिर्फ औपचारिकता, डीजे के तेज बेस से इमारतें हिल रहीं बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों की सेहत पर मंडरा रहा गंभीर खतरा

राजगढ़।
जिले में डीजे साउंड को लेकर प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी किए गए आदेश ज़मीनी स्तर पर सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं। आदेश के बावजूद रिहायशी इलाकों में देर रात तक बिना अनुमति और तय मानकों की अनदेखी कर तेज बेस और हाई फ्रीक्वेंसी वाला डीजे साउंड धड़ल्ले से बजाया जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई स्थानों पर स्लैब का कंक्रीट, पटिया और ईंटें तक हिलकर खिसकने और गिरने लगी हैं, जिससे भवनों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
डीजे साउंड से उत्पन्न होने वाला अत्यधिक वाइब्रेशन आसपास के मकानों में गैस की तरह फैलकर दीवारों में कंपन पैदा कर रहा है। कई जगहों पर पास रखे पानी के बर्तनों में भी हिलोरें उठती दिखाई दीं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि साउंड की तीव्रता कितनी खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है।
ईंट-कंक्रीट हिल रहे हैं, तो इंसान कैसे सुरक्षित रहेगा
विशेषज्ञों का कहना है कि जब ध्वनि तरंगों में इतनी शक्ति हो कि वे कंक्रीट और ईंटों को हिला दें, तो वही तरंगें मानव शरीर के आंतरिक अंगों, नसों और विशेष रूप से हृदय पर गहरा असर डालती हैं। चिकित्सकीय दृष्टि से यह सिद्ध है कि अत्यधिक हाई बेस साउंड दिल की धड़कनों की प्राकृतिक लय (Heart Rhythm) को बिगाड़ सकता है, जिससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने, घबराहट और हार्ट अटैक जैसी जानलेवा स्थितियां बन सकती हैं।
बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा
चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि डीजे साउंड का दुष्प्रभाव बच्चों पर सबसे अधिक और स्थायी हो सकता है। बच्चों का श्रवण तंत्र और मानसिक विकास अभी पूर्ण नहीं होता, ऐसे में तेज आवाज से
सुनने की क्षमता कमजोर हो सकती है,
नींद और एकाग्रता प्रभावित होती है,
डर, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव बढ़ता है,
पढ़ाई पर सीधा नकारात्मक असर पड़ता है।
इसी तरह बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और हृदय रोगियों के लिए भी डीजे साउंड के आसपास रहना अत्यंत जोखिम भरा बताया जा रहा है।
आदेशों की खुलेआम अनदेखी
प्रशासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि परीक्षा काल में बिना एसडीएम की अनुमति डीजे साउंड नहीं बजाया जाएगा। रिहायशी इलाकों, स्कूल परिसरों और अस्पतालों से डीजे को दूर रखने तथा निर्धारित डेसीबल सीमा में ही साउंड बजाने के आदेश थे, लेकिन इसके बावजूद कई क्षेत्रों में कर्णभेदी धमाकों के साथ डीजे साउंड बजते नजर आए।
धमनियों में भी महसूस हो रहा कंपन
स्थानीय लोगों का कहना है कि डीजे के बेहद पास जाने पर केवल कानों में दर्द ही नहीं, बल्कि धमनियों में भी कंपन महसूस होता है। अधिक नजदीक रहने पर यह स्थिति गंभीर और जानलेवा हो सकती है। कई नागरिकों ने रातभर डीजे बजने से बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ने की शिकायतें भी की हैं।
जनहित चेतावनी
डीजे का तेज बेस सिर्फ शोर नहीं, स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है
तेज डीजे साउंड से बच्चों की सुनने की शक्ति स्थायी रूप से कमजोर हो सकती है
हाई बेस साउंड दिल की धड़कन की लय बिगाड़ सकता है
अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने और हार्ट अटैक का खतरा
गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अत्यंत जोखिम
इमारतों में दरार और स्लैब गिरने जैसी घटनाओं की आशंका
🙏 डीजे संचालक, आयोजक और आमजन समझें
मनोरंजन करें, लेकिन किसी की जान जोखिम में न डालें।
नियमों का पालन करें, आवाज सीमित रखें और मानव जीवन का सम्मान करें।

