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सीमांचल: मधुपालन लाभदायक, उठाएं राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय योजनाओं का लाभ

कटिहार : सीमांचल क्षेत्र में मधुमक्खी पालन किसानों के लिए लाभदायक व्यवसाय बनता जा रहा है। कटिहार और पूर्णिया जिलों में राष्ट्रीय स्तर पर 35-40 किलो मधु सालाना निष्कासन होता है, जबकि सीमांचल में यह उत्पादन 50-55 किलो तक पहुँच जाता है। भूमिहीन किसानों के लिए यह योजना स्वरोजगार का अवसर प्रदान करती है।

कटिहार जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में मधुपालन के लिए दो प्रमुख योजनाएँ लागू हैं। जिला उद्यान पदाधिकारी रजनी सिन्हा ने बताया कि पहला राष्ट्रीय बागवानी मिशन है और दूसरा राज्य बागवानी मिशन। दोनों मिशनों में किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन:

मधुमक्खी बॉक्स और छत्तों के लिए लगभग 800 इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित है।
इसमें मधु निष्कासन यंत्र भी शामिल हैं।

राज्य बागवानी मिशन:

1900 बॉक्स और छत्तों का लक्ष्य निर्धारित है।
मधु निष्कासन यंत्र का प्रावधान भी इसमें है।

जो किसान मधुमक्खी पालन में इच्छुक हैं, उन्हें आवश्यक है कि वे आत्मा, उद्यान विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र जैसे सरकारी संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त करें। प्रशिक्षण प्राप्त किसान ही इन योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।

वर्तमान समय में कटिहार जिले में रबी का सीजन चल रहा है और चारों ओर सरसों के खेत हैं। मधुपालक इस दौरान अपने बॉक्स सरसों के खेतों में रख सकते हैं। फरवरी-मार्च में लीची का सीजन शुरू हो जाता है, जिसमें भी मधु निष्कासन किया जा सकता है। इसके बाद फसल के आधार पर मधुपालक अपने बॉक्स माइग्रेशन के माध्यम से दूसरे क्षेत्रों में ले जाते हैं।

प्रगतिशील मधुपालक सदानंद मंडल ने बताया कि किसी भी क्षेत्र का मुख्य मधुपालन सीजन सरसों का होता है। सीमांचल क्षेत्र में एक बॉक्स से तीन राउंड में कुल 12 किलो मधु उत्पादन संभव है। इस बार मौसम ने थोड़ी चुनौती दी, अन्यथा रिकॉर्ड उत्पादन संभव था।

सदर मंडल ने बताया कि सरसों समाप्त होने के बाद मधुपालक भागलपुर में सीजन शुरू कर देते हैं। रइचा में दो राउंड और लीची में तीन राउंड में मधु निष्कासन किया जा सकता है। यहाँ माइग्रेशन में खर्च कम आता है क्योंकि खेत नज़दीकी में हैं। इस तरह की योजना विशेष रूप से भूमिहीन किसानों के लिए स्वरोजगार का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करती है।

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