SECL की जमीन पर नगर पालिका का दुस्साहस? बिना एनओसी कैसे चला टेंडर और शुरू हुआ निर्माण
राजस्व रिकॉर्ड में भूमि SECL के नाम, फिर किसके आदेश पर हुआ भूमि पूजन और खर्च हुआ सरकारी धन

धनपुरी/शहडोल।( मोहम्मद असलम बाबा) सोहागपुर कोयलांचल क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों की जमीन पर स्थानीय निकायों द्वारा निर्माण को लेकर उठते सवाल अब सीधे कार्रवाई तक पहुंच गए हैं। एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत खसरा नंबर 282 पर नगर पालिका परिषद धनपुरी द्वारा बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) कम्युनिटी हॉल निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू किया गया था, जिसे एसईसीएल प्रबंधन के हस्तक्षेप के बाद तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया गया। इस कार्रवाई ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
भूमि SECL की, निर्माण नगर पालिका का—कैसे बनी सहमति
राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर 282 स्पष्ट रूप से एसईसीएल के स्वामित्व में दर्ज है। इसके बावजूद नगर पालिका परिषद द्वारा न केवल यहां पूर्व में व्यावसायिक ढांचे विकसित किए गए, बल्कि हाल ही में कम्युनिटी हॉल निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई और भूमि पूजन कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान नगर पालिका की ओर से भूमि स्वामित्व अथवा एनओसी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
SECL की भूमि पर नगर पालिका की कमाई, नियमों की अनदेखी?
सूत्रों के अनुसार विवादित भूमि पर पहले से संचालित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और सामुदायिक भवन से नगर पालिका परिषद वर्षों से किराया वसूल रही है। नियमानुसार, सार्वजनिक उपक्रम की भूमि से होने वाली आय अथवा तो उसी उपक्रम को मिलनी चाहिए या फिर विधिवत हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है कि नगर पालिका किस नियम के तहत इस भूमि से राजस्व अर्जित कर रही है और अब तक इस पर कोई आपत्ति क्यों नहीं उठी।
प्रबंधन सख्त, मौके पर पहुंची सुरक्षा और प्रशासनिक टीम
मामला संज्ञान में आते ही एसईसीएल प्रबंधन ने इसे संपत्ति संरक्षण से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। बुढ़ार एवं शारदा उपक्षेत्र की प्रशासनिक और सुरक्षा टीम मौके पर पहुंची और निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से बंद कराया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना वैधानिक अनुमति और स्वामित्व प्रमाण के किसी भी प्रकार का निर्माण स्वीकार्य नहीं होगा।
नगर पालिका की भूमिका पर उठे पांच बड़े सवाल
जब भूमि एसईसीएल की है, तो बिना एनओसी टेंडर प्रक्रिया कैसे पूरी हुई?
भूमि पूजन और निर्माण प्रारंभ करने की अनुमति किस स्तर से दी गई?
पूर्व में बनी इमारतों से वसूले गए किराये का वैधानिक आधार क्या है?
निर्माण से पहले तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर भूमि स्वामित्व की जांच क्यों नहीं की गई?
क्या अब एसईसीएल प्रबंधन पुराने निर्माणों और राजस्व की वसूली की दिशा में कदम बढ़ाएगा?
कारण बताओ नोटिस, आगे कानूनी कार्रवाई के संकेत
एसईसीएल प्रबंधन द्वारा नगर पालिका परिषद धनपुरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण पाए जाने पर सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद पूरे कोयलांचल क्षेत्र में अन्य अतिक्रमण मामलों को लेकर भी प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।



