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उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती करें सुनिश्चित : उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ई-संजीवनी का प्रभावी उपयोग कर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ परामर्श की उपलब्धता बढ़ाएं

 

भोपाल, ।    उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता एवं प्रभावशीलता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि इन सेवाओं की प्रगति, विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान, फॉलोअप एवं समय पर संस्थागत भर्ती की नियमित समीक्षा की जाएग। सभी स्तरों पर अधिकारियों एवं मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी और जवाबदेही निर्धारित कर अपेक्षित परिणाम सुनिश्चित किए जाएं।

 

ई-संजीवनी से ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ परामर्श की उपलब्धता बढ़ाएं

 

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के प्रभावी उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए आमजन को सेवा के प्रति जागरूक एवं प्रेरित करने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपयोगिता के प्रति विश्वास विकसित करना आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल कहा कि भारत में तकनीक को अपनाने की व्यापक क्षमता का प्रत्यक्ष उदाहरण यूपीआई है। इसी प्रकार स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक का प्रभावी उपयोग कर नागरिकों को सहज एवं गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-संजीवनी के उपयोग में आने वाली बाधाओं एवं सेवाओं की उपलब्धता में मौजूद अंतराल की पहचान कर उन्हें दूर किया जाए। आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ सेवा के उपयोग एवं परिणामों की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि मरीजों को अनावश्यक आवागमन से राहत मिले।

 

उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर संस्थागत भर्ती सुनिश्चित करें

 

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि सभी गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन एवं निर्धारित प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) सुनिश्चित की जाए। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के अंतर्गत पात्र महिलाओं की जांच तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (एचआरपी) की समय पर पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाए। परिवारजनों को नियमित जांच और संस्थागत प्रसव के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग भी लिया जाए।

 

समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में चिन्हित उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं में से लगभग 30 प्रतिशत ही पर्याप्त समय पूर्व स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती हो पा रही हैं। इस स्थिति में सुधार के लिए उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विशेष कार्ययोजना के अनुरूप समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिन्हित महिलाओं की पहचान के बाद उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी, आवश्यक जांच एवं उपचार तथा समय पर संस्थागत भर्ती सुनिश्चित की जाए। आशा एवं एएनएम सहित मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर फॉलोअप की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।

 

अनमोल पोर्टल एवं सुमन कमांड सेंटर से होगी प्रभावी निगरानी

 

समीक्षा में बताया गया कि अनमोल पोर्टल पर लगभग 6.2 लाख गर्भवती महिलाओं का विवरण दर्ज है, जिनमें लगभग 2 लाख महिलाओं को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के रूप में चिन्हित किया गया है। सुमन इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर के माध्यम से भी इन महिलाओं के फॉलोअप की निगरानी की जा रही है। पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी संबंधित आशा कार्यकर्ताओं एवं जिला अधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है।

 

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने डिजिटल व्यवस्था का प्रभावी उपयोग करते हुए उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समयबद्ध निगरानी एवं संस्थागत भर्ती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सुमन पंचायत की अवधारणा को प्रोत्साहित करने तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति समुदाय की सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया।

 

नवजात एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश

 

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने नवजात शिशुओं एवं गंभीर रूप से बीमार बच्चों के उपचार की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं एवं आवश्यक उपकरणों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। कुपोषण से प्रभावित बच्चों की पहचान, उपचार एवं पोषण पुनर्वास के साथ एनीमिया, दस्त एवं निमोनिया जैसी प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम के लिए संचालित कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए।

उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए विभागीय समन्वय, तकनीक एवं मैदानी अमले की सक्रियता के साथ परिणामों की नियमित समीक्षा आवश्यक है। सभी संबंधित अधिकारी निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करते हुए सेवाओं की गुणवत्ता एवं उपलब्धता में निरंतर सुधार सुनिश्चित करें।

 

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की प्रमुख उपलब्धियां

 

बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में सितंबर तक प्रदेश में 90.6 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का प्रथम तिमाही में पंजीयन हुआ है तथा 93.4 प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं। एसआरएस 2022-24 के अनुसार प्रदेश की मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 135 है। गर्भवती महिलाओं को बेहतर देखभाल उपलब्ध कराने के लिए 35 प्रसूति आईसीयू, 109 प्रथम रेफरल इकाइयां तथा 229 बर्थ वेटिंग होम क्रियाशील हैं।

 

नवजात एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रदेश में 62 विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां (SNCU), 200 नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयां (NBSU), 24 मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट, 68 बाल गहन चिकित्सा इकाइयां (PICU) तथा 318 पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 2 मानव दुग्ध बैंक क्रियाशील हैं, 8 प्रक्रियाधीन हैं तथा 26 लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट उपलब्ध हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में SNCU में 1,34,317 नवजात शिशुओं, NBSU में 45,982 नवजात शिशुओं तथा PICU में 1,19,032 बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया गया। इसी अवधि में पोषण पुनर्वास केंद्रों में 80,092 बच्चों को सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान SNCU में 72,595, NBSU में 22,793 तथा PICU में 59,450 बच्चों को भर्ती कर उपचार दिया गया, जबकि पोषण पुनर्वास केंद्रों में 47,912 बच्चों को सेवाएं प्रदान की गईं।

 

एनीमिया मुक्त भारत अभियान के क्रियान्वयन एवं नवाचार आधारित जन-जागरूकता गतिविधियों में मध्यप्रदेश को अगस्त 2026 में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। वहीं, एएमबी इंडेक्स 2025-26 में आयरन एवं फोलिक एसिड के निवारक अनुपूरण में प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। ई-संजीवनी के माध्यम से अप्रैल से सितंबर 2026 तक प्रदेश में 59,914 जनरल टेली-कंसल्टेशन तथा 10,890 विशेषज्ञ टेली-कंसल्टेशन किए गए। मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से भी विशेषज्ञ टेली-कंसल्टेशन सेवाएं संचालित की जा रही हैं। इन सेवाओं का प्रभावी उपयोग कर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ परामर्श की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक में वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ प्रभाकर तिवारी, डॉ अर्चना मिश्रा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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