UFBU के आह्वान पर देशव्यापी बैंक हड़ताल, भोपाल के एमपी नगर प्रेस कॉम्प्लेक्स में गूंजा एकजुटता का स्वर

भोपाल। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशभर में अलग-अलग स्थानों पर बैंककर्मियों की हड़ताल व्यापक रूप से एवं प्रभावी ढंग से सम्पन्न हुई। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु सहित प्रमुख महानगरों से लेकर राज्य एवं जिला मुख्यालयों तक बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी न्यायोचित मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हड़ताल का प्रमुख केंद्र एमपी नगर स्थित प्रेस कॉम्प्लेक्स, पीएनबी के पास रहा, जहाँ बड़ी संख्या में बैंक के 5000 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। “5-दिवसीय बैंकिंग लागू करो”, “बैंककर्मियों के स्वास्थ्य और सम्मान से समझौता नहीं” जैसे गगनभेदी नारों के साथ आंदोलनकारियों ने सरकार एवं बैंक प्रबंधन को स्पष्ट संदेश दिया कि अब टालमटोल की नीति स्वीकार्य नहीं है।
हड़ताल का नेतृत्व UFBU के संयोजक श्री संजीव कुमार मिश्रा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष सुबीन सिन्हा एवं सेक्रेटरी दिनेश झा तथा भारतीय स्टेट बैंक अधिकारी संघ भोपाल सर्कल के अध्यक्ष अनिल कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर घटक दलों के वरिष्ठ कामरेड वीरू शर्मा, दीपकरत्न शर्मा, संजय कुदेशिया, नज़ीर कुरेशी, शोभित वादेल , प्रवीण मेघानी, वी.एस. नेगी एवं सुनील सिंह,संगठन मीडिया प्रभारी अरविंद पंडियार की सक्रिय भूमिका रही।
इसके अतिरिक्त रजनीश पौराणिक, सुरेश बाबू मीणा,स्वप्निल चतुर्वेदी , क्षितिज तिवारी, निर्भय सिंह, मनीष भार्गव, नितिन बिखानी, विजय चौटानी, अंबरिश नंदा, राजेश नायक, जितेंद्र बग्गा, प्रियंका गुप्ता, दीपक नायर, अंकुर दुबे, सुखमीत कौर, राहुल करौलिया, कुलदीप स्वर्णकार, विजय राघवन, अमित गुप्ता, संजय सिंह, देवेंद्र दांगी, सुमित मिश्रा, हितेश कुमार, देवेश जैन, मोनिका भागवानी, कपिला मेघानी, प्रशांत रघुवंशी, रोहित यादव, अमित प्रजापति, जयंत सेन, सेतु पाठक, राहुल खरे, ब्रजेश कुशवाहा, अनिल कुमार, मुदित जोशी, कीर्ति खरे, विनीता दुबे, पूजा कुशवाहा, के के त्रिपाठी, मनीष चतुर्वेदी, विभु जोशी सहित बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिला साथियों ने बढ़-चढ़कर हड़ताल में भाग लिया, जिससे आंदोलन को और अधिक मजबूती मिली।
साथ ही मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर भी एवं AIBOC के बैनर तले बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एकजुट होकर हड़ताल में सहभागिता की। जिला एवं अंचल मुख्यालयों पर हुए प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि बैंककर्मियों की मांगें केवल स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की साझा और निर्णायक आवाज़ हैं।
नेताओं ने अपने संबोधन में तर्कपूर्ण ढंग से कहा कि 5-दिवसीय बैंकिंग केवल कर्मचारियों की सुविधा का प्रश्न नहीं, बल्कि बेहतर ग्राहक सेवा, प्रभावी जोखिम प्रबंधन एवं स्वस्थ कार्य-संस्कृति के लिए अनिवार्य सुधार है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बैंकिंग क्षेत्र की जमीनी सच्चाइयों को समझते हुए कर्मचारियों की लंबित एवं न्यायोचित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए, अन्यथा आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा।UFBU के द्वारा भविष्य के दिए गए कॉल लागू रहेंगे।



