बिहार-झारखण्‍ड

पूर्णिया की महिलाओं के हुनर का जलवा अब अमेरिका तक

पूर्णिया(SHABD) : बिहार के पूर्णिया जिले की महिलाओं का हुनर अब सात समंदर पार अमेरिका तक पहुंच गया है। जिले के स्थानीय स्टार्टअप “हाउस ऑफ मैथिली” को अमेरिका के कैलिफोर्निया से सूती चादरों से तैयार किए जाने वाले कस्टमाइज्ड जैकेट्स का बड़ा ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर को तैयार करने में वर्तमान में लगभग 50 स्थानीय महिलाएं जुटी हुई हैं। यह पहल न केवल ग्रामीण महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

पूर्णिया स्थित स्टार्टअप “हाउस ऑफ मैथिली” पारंपरिक भारतीय सूती एवं हस्तनिर्मित कपड़ों को आधुनिक डिजाइन और वेस्टर्न लुक के साथ तैयार कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है। हाल ही में इस स्टार्टअप को अमेरिका के कैलिफोर्निया से सूती चादरों से बने विशेष डिजाइन वाले जैकेट्स का ऑर्डर प्राप्त हुआ है।

इन जैकेट्स को तैयार करने का कार्य पूर्णिया की स्थानीय महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें रोजगार मिलने के साथ-साथ इस बात की भी खुशी है कि उनके हाथों से बने परिधान विदेशों में भी पसंद किए जा रहे हैं।

“हाउस ऑफ मैथिली” की शुरुआत सरकार की सहायता एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के तहत की गई थी। वर्तमान में यह स्टार्टअप लगभग 100 महिलाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध करा रहा है।

स्टार्टअप से जुड़ी महिलाएं सिलाई, डिजाइनिंग और फिनिशिंग जैसे कार्यों में अपनी भूमिका निभा रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है और वे अपने परिवार की आय बढ़ाने में भी सहयोग कर रही हैं।

हाउस ऑफ मैथिली के संस्थापक मनीष रंजन ने बताया कि सरकार की बेहतर नीतियों और महिलाओं के कौशल विकास कार्यक्रमों के कारण यह सफलता संभव हो पाई है। उन्होंने कहा कि बिहार की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए जैकेट्स को अमेरिका में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।

उन्होंने बताया कि बिहार के सिल्क और सूती वस्त्रों की मांग हमेशा से रही है, लेकिन पूर्णिया की पारंपरिक सूती चादरों को आधुनिक वेस्टर्न जैकेट के रूप में तैयार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे यह साबित हुआ है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही प्रशिक्षण, बेहतर मंच और सरकारी सहयोग मिले, तो वे वैश्विक बाजार में भी अपनी पहचान बना सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे स्टार्टअप न केवल स्थानीय हस्तकला और पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान दे रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहे हैं। इससे बिहार की महिलाओं को अपने हुनर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

स्टार्टअप से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, लेकिन अब उन्हें अपने हुनर के दम पर आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर मिला है। विदेशों में उनके बनाए परिधानों की मांग बढ़ने से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

पूर्णिया की यह सफलता कहानी अब अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। यह पहल दिखाती है कि मेहनत, हुनर और सही अवसर मिलने पर बिहार की महिलाएं देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

Related Articles

Back to top button