कार्रवाई नहीं होने से नाराज आवेदक ने 2 जून 2026, मंगलवार को सुबह 11 बजे राजगढ़ कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है।

राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ नगर पालिका में कर्मचारी भर्ती में कथित भ्रष्टाचार का मामला एक बार फिर गरमा गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भोपाल संभाग कमिश्नर के स्पष्ट आदेश के बावजूद राजगढ़ कलेक्टर द्वारा आज दिनांक तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब कार्रवाई नहीं होने से नाराज आवेदक ने 2 जून 2026, मंगलवार को सुबह 11 बजे राजगढ़ कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि राजगढ़ जिले की सारंगपुर, पचोर, राजगढ़, खिलचीपुर और जीरापुर नगर पालिकाओं में कर्मचारी भर्ती मामलों में कार्रवाई की गई, लेकिन नरसिंहगढ़ नगर पालिका में हुए कथित भारी भ्रष्टाचार पर प्रशासन मौन बना हुआ है। इसे लेकर कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
आवेदक के अनुसार भोपाल संभाग कमिश्नर द्वारा पत्र क्रमांक 1212/145,151/शिकायत शाखा/भोपाल/2025 दिनांक 21 फरवरी 2025 को जारी कर राजगढ़ कलेक्टर को नरसिंहगढ़ नगर पालिका कर्मचारी भर्ती मामले में आवश्यक कार्रवाई कर आवेदक को अवगत कराने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके आज तक न तो किसी प्रकार की कार्रवाई हुई और न ही शिकायतकर्ता को किसी जांच या कार्रवाई की जानकारी दी गई।
शिकायतकर्ता ने बताया कि इस मामले में पूर्व में भी कई आवेदन दिए जा चुके हैं। इसके बाद 22 अप्रैल 2026 को पुनः आवेदन प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की मांग की गई थी। आवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि एक माह के भीतर उचित कार्रवाई नहीं होने पर वह बिना पूर्व सूचना के कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल करने के लिए स्वतंत्र रहेगा। अब एक माह की अवधि पूर्ण होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से वह आंदोलन के लिए विवश है।
आवेदक ने घोषणा की है कि वह 2 जून को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा और नीले झंडे के साथ कलेक्टर कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू करेगा।
भूख हड़ताल की प्रमुख मांगें
कमिश्नर भोपाल संभाग के आदेशानुसार नरसिंहगढ़ नगर पालिका से हटाए गए शाखावार सभी कर्मचारियों की सूची उपलब्ध कराई जाए।
हटाए गए कर्मचारियों के वित्तीय भुगतान पर तत्काल रोक लगाने के आदेश जारी किए जाएं तथा दोनों आदेशों की प्रमाणित प्रति आवेदक को उपलब्ध कराई जाए।
आवेदक ने साफ कहा है कि जब तक दोनों मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना प्रदर्शन और भूख हड़ताल लगातार जारी रहेगी। साथ ही आंदोलन के दौरान होने वाले सभी परिणामों की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और शासन की होगी।



