मध्यप्रदेश

स्वच्छता का ‘न्याय’: देपालपुर कोर्ट परिसर बना नंबर-1, जिला न्यायाधीश बोले- इसे संस्कार बनाएं

इंदौर नगर निगम के गोपनीय सर्वे में देपालपुर सिविल कोर्ट ने मारी बाजी; गरिमामय शिविर में स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने का लिया संकल्प

 

देपालपुर (इंदौर)। स्वच्छता के क्षेत्र में देश का सिरमौर इंदौर अब अपने पड़ोसी क्षेत्रों में भी सुशासन और सफाई की मिसाल पेश कर रहा है। इंदौर नगर निगम द्वारा गोद लिए गए देपालपुर नगर परिषद क्षेत्र में किए गए एक गोपनीय स्वच्छता सर्वेक्षण में सिविल कोर्ट परिसर, देपालपुर ने बाजी मारते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि यदि अनुशासन और इच्छाशक्ति हो, तो सरकारी दफ्तर भी किसी कॉर्पोरेट ऑफिस की तरह चमक सकते हैं।

गोपनीय टीम ने परखा था ‘सफाई का स्तर’

नगर निगम आयुक्त द्वारा गठित एक विशेष सर्वे दल ने देपालपुर के सभी शासकीय कार्यालयों का औचक और गोपनीय निरीक्षण किया था। इस दौरान कचरा प्रबंधन, जल निकासी, हरियाली और परिसर की सामान्य सफाई जैसे कड़े मानकों पर देपालपुर न्यायालय को सबसे उत्कृष्ट पाया गया।

न्यायालय में स्वच्छता शिविर: संकल्प से सिद्धि की ओर

इस गौरवशाली उपलब्धि के उपलक्ष्य में व्यवहार न्यायालय देपालपुर में एक विशेष स्वच्छता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने की। इस दौरान पूरा न्यायालय परिसर न केवल न्याय की गरिमा बल्कि स्वच्छता की आभा से भी सराबोर नजर आया।

न्यायाधीश खान ने अपने संबोधन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात कही—

“स्वच्छता कोई एक दिन का इवेंट या केवल सरकारी अभियान नहीं है, बल्कि इसे हमारी दिनचर्या और संस्कारों का हिस्सा होना चाहिए। जब हम अपने कार्यस्थल को स्वच्छ रखते हैं, तो वहाँ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे कार्यकुशलता बढ़ती है।”

दिग्गजों की मौजूदगी में ‘क्लीन देपालपुर’ का संकल्प

कार्यक्रम में न्यायपालिका और प्रशासन के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए। सीनियर सिविल जज श्रीमती रिजवाना कौसर, सुमित्रा ताहेड़ और दिव्या श्रीवास्तव ने भी स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नगर परिषद की ओर से सी.एम.ओ. बहादुर सिंह रघुवंशी और सफाई दरोगा शैलेश कुराडिया ने इस उपलब्धि को टीम वर्क का नतीजा बताया।

अधिवक्ता संघ ने बढ़ाया उत्साह:

अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अंतर सिंह मौर्य और सचिव दिनेश डोंड की मौजूदगी में वकीलों ने भी शपथ ली कि वे परिसर को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से मुक्त रखेंगे। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र पटेल, चेतन हार्डिया, और न्यायालयीन कर्मचारी जैसे नायब नाजिर दिलीप यादव व सेलअमीन देवेंद्र कछवाह सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

खबर का नजरिया: क्यों खास है यह उपलब्धि?

आमतौर पर अदालतों में फाइलों के अंबार और भीड़भाड़ के बीच स्वच्छता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। लेकिन देपालपुर न्यायालय ने इस धारणा को तोड़ दिया है।

प्रथम स्थान: सभी शासकीय कार्यालयों को पछाड़कर नंबर-1 बनना अनुशासन का प्रतीक है।

जन-आंदोलन: जजों और वकीलों का झाड़ू उठाना या सफाई का निरीक्षण करना समाज को संदेश देता है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता।

सकारात्मक संदेश: यहाँ आने वाले पक्षकारों (आम जनता) पर स्वच्छ वातावरण का मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है, जो न्याय प्रणाली के प्रति विश्वास बढ़ाता है।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने एक सुर में संकल्प लिया कि इस ‘प्रथम स्थान’ की रैंकिंग को न केवल बरकरार रखा जाएगा, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन बनाकर घर-घर तक पहुँचाया जाएगा। देपालपुर कोर्ट की यह चमक अब जिले के अन्य कार्यालयों के लिए प्रेरणापुंज बन गई है।

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