मध्यप्रदेश

मौत का ‘लॉज’: कोतमा में भरभरा कर ढही बहुमंजिला इमारत, 20 घंटे चले रेस्क्यू के बाद मलबे से निकले 4 शव

प्रशासनिक लापरवाही और अवैध निर्माण की भेंट चढ़ी चार जिंदगियां; SECL की माइन रेस्क्यू टीमों ने मलबे के बीच से चलाया 'ऑपरेशन जिंदगी'

 

 

अनूपपुर/कोतमा(असलम बाबा)अनूपपुर जिले के कोतमा में शनिवार की शाम एक बड़ा हादसा चीख-पुकार में बदल गया। बस स्टैंड के समीप स्थित ‘अग्रवाल लॉज’ की तीन मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। मलबे के नीचे दबने से 4 लोगों की मौत हो गई, जिनमें तीन पुरुष और एक महिला शामिल हैं। हादसे के समय ऊपरी मंजिल पर निर्माण कार्य चल रहा था, जबकि भूतल के पास नींव की खुदाई की जा रही थी, जिसे प्रारंभिक तौर पर हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर जागा प्रशासन, SECL ने संभाली कमान

हादसे की भयावहता को देखते हुए मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय ने तत्काल राहत कार्यों के निर्देश जारी किए। इसके बाद साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के सीएमडी श्री हरीश दुहन ने मोर्चा संभाला। SECL ने तत्काल दिल्ली से NDRF और क्षेत्रीय SDRF टीमों से समन्वय स्थापित किया।

सबसे महत्वपूर्ण भूमिका SECL की 4 विशेषज्ञ रेस्क्यू टीमों ने निभाई, जो जमुना-कोतमा, हसदेव और सोहागपुर क्षेत्रों से महज 35 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गईं। खदानों के भीतर रेस्क्यू करने का अनुभव रखने वाली इन टीमों ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ऑपरेशन शुरू किया।

चुनौतियां: खिसकता मलबा और जोखिम भरा रेस्क्यू

हादसा स्थल पर भारी मात्रा में कंक्रीट और सरियों का जाल फैला हुआ था। जैसे ही एक्स्कवेटर मशीनें मलबा हटातीं, ऊपर का हिस्सा नीचे धंसने का खतरा पैदा हो जाता। पूरी रात और अगले दिन दोपहर 2 बजे तक (तकरीबन 20 घंटे) यह अभियान बिना रुके चला। मलबे के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए ड्रिलिंग मशीनों और भारी मशीनों का उपयोग किया गया।

इन अधिकारियों ने रात भर संभाला मोर्चा:

रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व माइन रेस्क्यू के अनुभवी विशेषज्ञ श्री मनोज बिश्नोई (AGM, हसदेव) ने किया, जो पूरी रात मलबे के पास डटे रहे। उनके साथ श्री प्रभाकर त्रिपाठी (AGM, जमुना-कोतमा), श्री अजय कुमार (GM ऑपरेशन्स) और श्री बी.के. जेना (AGM, सोहागपुर) की टीमों ने अपने प्रोफेशनलिज्म का परिचय देते हुए मलबे से शवों को बाहर निकाला।

जांच के घेरे में निर्माण कार्य

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुरानी इमारत के ऊपर नया निर्माण और पास में ही गहरी खुदाई ने इमारत की नींव को कमजोर कर दिया था। स्थानीय नागरिकों ने निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या इस निर्माण के लिए उचित अनुमति ली गई थी या यह नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा था।

संकट के इस समय में SECL की त्वरित प्रतिक्रिया ने एक बार फिर साबित किया कि कोयला प्रबंधन न केवल उत्पादन, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए भी सदैव तत्पर है। स्थानीय प्रशासन ने रेस्क्यू टीमों के अदम्य साहस की सराहना की है।

हादसे के मुख्य बिंदु:

समय: शनिवार शाम 5:30 बजे।

कुल हताहत: 4 (3 पुरुष, 1 महिला)।

रेस्क्यू की अवधि: लगभग 20 घंटे निरंतर।

सहयोग: SECL (जमुना-कोतमा, हसदेव, सोहागपुर), NDRF, SDRF और स्थानीय पुलिस।

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