मध्यप्रदेश

उड़न खटोले’ से विदा हुई लाडली: आंसुओं में भीगता रहा आंगन, पिता ने मुस्कुराकर आसमान को सौंप दी बेटी

 

शहडोल। मोहम्मद असलम बाबा बेटी की विदाई हर पिता के जीवन का सबसे कठिन क्षण होती है—जहां आंखें नम होती हैं, लेकिन होंठों पर मुस्कान रखनी पड़ती है। खैरहा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत धमनी कला में बुधवार को ऐसा ही एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब जमींदार किसान परिवार ने अपनी लाडली को ‘उड़न खटोले’ यानी हेलीकॉप्टर से विदा किया। शाही अंदाज में हुई यह विदाई केवल चर्चा का विषय नहीं बनी, बल्कि हर आंख को नम कर गई।

धमनी कला निवासी कुंवर आदित्य सिंह, पिता अंजय सिंह (पूर्व जनपद पंचायत सोहागपुर उपाध्यक्ष) के परिवार में विवाह समारोह संपन्न हुआ। आदित्य सिंह का विवाह सतना जिले के नागौद निवासी जमींदार किसान परिवार की पुत्री मृगांसी के साथ हुआ। विवाह की सभी रस्में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूरी हुईं, लेकिन विदाई का क्षण कुछ अलग और अविस्मरणीय बन गया।

दोपहर जब गांव के ऊपर हेलीकॉप्टर मंडराया, तो पूरा धमनी कला आसमान की ओर देखने लगा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनना चाहता था। घर के सामने ही विशेष रूप से हेलीपैड तैयार किया गया था। जैसे ही दूल्हा-दुल्हन हेलीकॉप्टर की ओर बढ़े, माहौल भावनाओं से भर गया।

सबसे मार्मिक दृश्य उस समय देखने को मिला जब पिता अंजय सिंह ने अपनी बेटी का हाथ थामे आखिरी बार उसे गले लगाया। आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर संतोष—कि उन्होंने अपनी बेटी को हर सुख देने की कोशिश की। गांव के लोग बताते हैं कि अंजय सिंह ने हमेशा अपनी बेटी को बेटे से बढ़कर मान दिया। उसकी हर छोटी-बड़ी इच्छा को पूरा किया और शिक्षा से लेकर संस्कार तक हर पहलू में उसे मजबूत बनाया।

दुल्हन मृगांसी भी विदाई के क्षणों में भावुक नजर आईं। मां के आंचल से लिपटकर रोती बेटी और उसे ढांढस बंधाता पिता—यह दृश्य वहां मौजूद हर शख्स के दिल को छू गया। जब हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी, तो नीचे खड़ा पिता तब तक आसमान को निहारता रहा, जब तक ‘उड़न खटोला’ आंखों से ओझल नहीं हो गया।

आदित्य सिंह एक निजी कंपनी में इंजीनियर हैं। उनके पिता अंजय सिंह क्षेत्र के प्रतिष्ठित किसान हैं और जनपद पंचायत सोहागपुर के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। परिवार की गढ़ी के पास ही हेलीपैड की व्यवस्था की गई थी। प्रशासन से अनुमति लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहली बार किसी बेटी की विदाई हेलीकॉप्टर से हुई। लेकिन इस शाही अंदाज से भी ज्यादा चर्चा उस पिता के प्रेम और उदारता की हो रही है, जिसने अपनी लाडली की खुशियों के लिए आसमान तक का रास्ता चुन लिया।

यह केवल एक हेलीकॉप्टर की उड़ान नहीं थी, बल्कि एक पिता के सपनों, त्याग और प्रेम की उड़ान थी। आंगन भले ही सूना हो गया हो, लेकिन उस दिन धमनी कला ने देख लिया कि बेटियां सचमुच पिता के दिल का सबसे कोमल हिस्सा होती हैं—जिन्हें विदा करते समय दिल टूटता भी है और गर्व से भर भी जाता है।

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